बीस साल बाद
न्यूयॉर्क के दो नौजवान दोस्त वादा करते हैं कि ठीक बीस साल बाद उसी दरवाज़े पर फिर मिलेंगे। उनमें से एक यह वादा निभाता है। वफ़ादारी और फ़र्ज़ पर ओ. हेनरी की कहानी।
- 5 मिनट का पाठ
- Ages 12+
- Classic retold
- 1900s
पुलिसवाला अपना डंडा घुमाता हुआ धीरे-धीरे गश्त लगा रहा था। रात के लगभग दस बज रहे थे, और बारिश की महक लिए एक ठंडी हवा ने गलियों को लगभग ख़ाली कर दिया था।
चलते-चलते वह दरवाज़े आज़माकर देखता कि वे बंद हैं या नहीं। अँधेरी दुकानों की खिड़कियों में झाँक लेता। वह एक लंबा-चौड़ा आदमी था, चाल में थोड़ी अकड़ थी, और वह वैसा ही दिखता था जैसा वह था: अमन का रखवाला।
शहर के उस हिस्से की ज़्यादातर दुकानें घंटों पहले बंद हो चुकी थीं। लेकिन एक ब्लॉक के बीचों-बीच, लोहे-लंगड़ के सामान की एक दुकान के अँधेरे दरवाज़े में, एक आदमी मुँह में बिना जला सिगार दबाए टेक लगाए खड़ा था।
जैसे ही पुलिसवाला पास आया, वह आदमी झट से बोल पड़ा।
एक दरवाज़े पर किया गया वादा
"सब ठीक है, अफ़सर," उसने कहा। "मैं बस एक दोस्त का इंतज़ार कर रहा हूँ। यह बीस साल पहले तय हुई मुलाक़ात है। आपको थोड़ा अजीब लग रहा होगा, है न? अगर आप तसल्ली करना चाहें कि सब कुछ ठीक-ठाक है, तो मैं समझा देता हूँ।"
उसने माचिस जलाई और अपना सिगार सुलगाया। रोशनी में एक पीला चेहरा दिखा, चौकोर जबड़ा, तेज़ आँखें, और दाईं भौंह के पास सफ़ेद-सा एक छोटा निशान। उसकी टाई-पिन में एक बड़ा हीरा जड़ा था, अजीब ढंग से।
"आज से ठीक बीस साल पहले की रात," उस आदमी ने आगे कहा, "इसी जगह एक रेस्तराँ हुआ करता था, जिसका नाम था 'बिग जो ब्रैडी'ज़'।"
"वह पाँच साल पहले तक यहीं था," पुलिसवाले ने कहा। "फिर उसे गिरा दिया गया।"
आदमी ने सिर हिलाया। उसने बताया कि बीस साल पहले उसने यहाँ जिमी वेल्स के साथ खाना खाया था, जो उसका सबसे क़रीबी दोस्त था और दुनिया का सबसे बढ़िया इंसान। दोनों न्यूयॉर्क में साथ-साथ, दो भाइयों की तरह, पले-बढ़े थे। वह अठारह साल का था, जिमी बीस का। अगली सुबह वह पश्चिम में अपनी क़िस्मत आज़माने निकलने वाला था।
जिमी किसी भी क़ीमत पर न्यूयॉर्क छोड़ने को तैयार नहीं था। उसके लिए धरती पर बस यही एक जगह थी। तो उस रात दोनों ने तय किया: ठीक बीस साल बाद, इसी घड़ी, चाहे उन पर कुछ भी बीते और उन्हें कितनी भी दूर से आना पड़े, वे यहीं फिर मिलेंगे।
हवा में इंतज़ार
"दिलचस्प कहानी है," पुलिसवाले ने कहा। "दो मुलाक़ातों के बीच काफ़ी लंबा वक़्त है। उसके बाद आपको अपने दोस्त की कोई ख़बर मिली?"
आदमी ने बताया कि कुछ समय तक दोनों ने चिट्ठियाँ लिखीं। फिर, साल-दो साल बाद, एक-दूसरे की ख़बर छूट गई। पश्चिम बहुत बड़ी जगह थी, और वह एक जगह टिककर नहीं रहा। लेकिन उसे पता था कि जिमी अगर ज़िंदा है तो ज़रूर आएगा। जिमी दुनिया का सबसे वफ़ादार, सबसे भरोसेमंद दोस्त था। वह ख़ुद आज रात इस दरवाज़े पर खड़े होने के लिए हज़ार मील का सफ़र करके आया था, और अगर उसका पुराना साथी आ गया, तो यह सफ़र वसूल हो जाएगा।
उसने एक शानदार घड़ी निकाली, जिसके ढक्कन पर छोटे-छोटे हीरे जड़े थे।
"दस बजने में तीन मिनट," उसने कहा। "जब हमने रेस्तराँ के दरवाज़े पर विदा ली थी, तब ठीक दस बजे थे।"
"पश्चिम में आपने काफ़ी तरक़्क़ी कर ली, है न?" पुलिसवाले ने पूछा।
"और क्या! काश जिमी ने इसकी आधी भी कर ली हो। वह धीमा, सधा हुआ आदमी था, भला बंदा। मुझे अपनी दौलत जोड़ने के लिए कुछ सबसे तेज़-तर्रार लोगों से मुक़ाबला करना पड़ा है। न्यूयॉर्क में आदमी एक ही ढर्रे में अटककर रह जाता है। उस पर उस्तरे जैसी धार चढ़ाने के लिए पश्चिम चाहिए।"
पुलिसवाले ने अपना डंडा घुमाया और एक-दो क़दम आगे बढ़ा।
"मैं चलता हूँ," उसने कहा। "उम्मीद है आपका दोस्त ठीक-ठाक आ जाएगा। अगर वह वक़्त पर न आया तो क्या आप चले जाएँगे?"
"हरगिज़ नहीं! मैं उसे कम से कम आधा घंटा दूँगा। अगर जिमी धरती पर कहीं ज़िंदा है, तो तब तक यहाँ पहुँच जाएगा। शुभ रात्रि, अफ़सर।"
"शुभ रात्रि, जनाब," पुलिसवाले ने कहा, और दरवाज़े आज़माता हुआ अपनी गश्त पर आगे बढ़ गया।
लंबे कोट वाला एक लंबा आदमी
महीन, ठंडी फुहार गिरने लगी। हवा और तेज़ हो गई। जो इक्का-दुक्का लोग अब भी बाहर थे, वे कॉलर ऊपर किए जल्दी-जल्दी गुज़र रहे थे।
पश्चिम से आया आदमी दरवाज़े में खड़ा इंतज़ार करता रहा और सिगार पीता रहा।
कोई बीस मिनट बाद, लंबा ओवरकोट पहने एक लंबा आदमी, जिसने कॉलर कानों तक चढ़ा रखा था, जल्दी से सड़क पार करके सीधा उसके पास आया।
"क्या यह तुम हो, बॉब?" उसने कुछ झिझकते हुए पूछा।
"क्या यह तुम हो, जिमी वेल्स?" दरवाज़े में खड़ा आदमी चिल्ला उठा।
"अरे वाह!" नए आए आदमी ने उसके दोनों हाथ थामते हुए कहा। "यह तो बॉब ही है, पक्का। मुझे यक़ीन था कि अगर तुम ज़िंदा हो तो यहीं मिलोगे। बीस साल लंबा वक़्त होता है। पुराना रेस्तराँ नहीं रहा, बॉब। काश वह बचा रहता, तो हम वहाँ एक बार फिर खाना खा लेते।"
बाँह में बाँह डाले, दोनों सड़क पर चल पड़े। पश्चिम वाला आदमी अपनी कामयाबी, अपनी दौलत और अपने कारनामों के बारे में बताने लगा। दूसरा अपने ओवरकोट में सिमटा सुनता रहा।
नुक्कड़ पर एक दवाख़ाना था, बिजली की रोशनी से जगमगाता हुआ। जैसे ही वे उस चकाचौंध में आए, दोनों ने एक ही पल में मुड़कर एक-दूसरे का चेहरा देखा।
पर्ची
पश्चिम वाला आदमी एकदम रुक गया और अपनी बाँह छुड़ा ली।
"तुम जिमी वेल्स नहीं हो," उसने तड़ककर कहा। "बीस साल लंबा वक़्त है, पर इतना लंबा नहीं कि आदमी की नाक की बनावट ही बदल जाए।"
"कभी-कभी वह एक अच्छे आदमी को बुरा बना देता है," लंबे आदमी ने कहा। "तुम दस मिनट से गिरफ़्तार हो, सिल्की बॉब। शिकागो को शक है कि तुम रास्ते में न्यूयॉर्क रुके होगे, और उन्होंने हमें संदेश भेजा है कि वे तुमसे दो बातें करना चाहते हैं। चुपचाप चलोगे? समझदारी की बात है। अब, थाने चलने से पहले, यह एक पर्ची है जो मुझे तुम्हें देने को कहा गया था। यहीं खिड़की के पास पढ़ लो। यह पैट्रोलमैन वेल्स की तरफ़ से है।"
पश्चिम वाले आदमी ने काग़ज़ का वह छोटा-सा टुकड़ा खोला। जब उसने पढ़ना शुरू किया, तो उसका हाथ स्थिर था। जब तक उसने पढ़ना ख़त्म किया, हाथ हल्का-सा काँप रहा था।
पर्ची छोटी-सी थी।
उसमें लिखा था: बॉब, मैं वक़्त पर उस जगह पहुँच गया था। जब तुमने सिगार जलाने के लिए माचिस जलाई, तो मैंने देखा कि यह उसी आदमी का चेहरा है जिसकी शिकागो को तलाश है। न जाने क्यों, मुझसे यह ख़ुद नहीं हो सका, इसलिए मैं जाकर सादे कपड़ों वाले एक सिपाही को यह काम करने के लिए ले आया। जिमी।
इस कहानी के बारे में
ओ. हेनरी, विलियम सिडनी पोर्टर (1862–1910) का क़लमी नाम था। वे एक अमेरिकी लेखक थे, जो शहर के आम लोगों पर अपनी गर्मजोशी भरी, चुटीली कहानियों और उनके चौंकाने वाले अंत के लिए मशहूर हैं। "आफ़्टर ट्वेंटी इयर्स" 1906 में द फ़ोर मिलियन संग्रह में शामिल हुई थी। यह उसका एक छोटा और सरल किया हुआ पुनर्कथन है।