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Kindness

एंड्रोक्लीज़ और शेर

रेगिस्तान की एक गुफ़ा में छिपे एक भागे हुए ग़ुलाम की मुलाक़ात एक ऐसे शेर से होती है जिसके पंजे में ज़ख़्म है। बरसों बाद, रोम के एक गरजते अखाड़े में, वे फिर मिलते हैं।

  • 4 मिनट का पाठ
  • Ages 7+
  • Fable & folk tale
  • Ancient Rome
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रेत पर सूरज आग बरसा रहा था। कहीं कोई छाँव नहीं थी, कोई पानी नहीं, हवा के सिवा कोई आवाज़ नहीं।

एंड्रोक्लीज़ लड़खड़ाता हुआ आगे बढ़ता रहा। उसके होंठ फट गए थे और पैरों से ख़ून बह रहा था। उसके पीछे, अब बहुत दूर, अफ़्रीका में रोमन गवर्नर का वह घर था जहाँ वह ग़ुलाम रहा था। उसका मालिक इतना सख़्त और निर्दयी था कि एंड्रोक्लीज़ ने तय कर लिया था कि वहाँ एक दिन और रहने से बेहतर है रेगिस्तान का सामना करना।

पर रेगिस्तान उसकी सोच से भी ज़्यादा बेरहम निकला। जब उसे आगे चट्टानों में एक अँधेरा मुहाना दिखा, तो वह राहत से रेंगकर उसमें घुस गया और ठंडी छाँव में लेट गया।

गुफ़ा में एक मेहमान

उसे आराम करते ज़्यादा देर नहीं हुई थी कि उसे एक ऐसी आवाज़ सुनाई दी जिससे उसका ख़ून जम गया।

एक दहाड़।

एक बहुत बड़ा शेर गुफ़ा की ओर आ रहा था। एंड्रोक्लीज़ चट्टान से चिपक गया और साँस तक रोक ली। उसे पक्का यक़ीन था कि यह शेर का अपना घर है, और अब वह उसे खा जाएगा।

पर शेर झपटा नहीं। वह तीन पैरों पर लंगड़ाता हुआ गुफ़ा में आया, अगला एक पंजा ज़मीन से ऊपर उठाए हुए। वह ग़ुस्से में दहाड़ नहीं रहा था, दर्द से कराह रहा था।

उस विशाल जानवर ने एंड्रोक्लीज़ की ओर देखा। फिर धीरे-धीरे वह पास आया और अपना पंजा उसकी ओर बढ़ा दिया, मानो मदद माँग रहा हो।

काँटा

एंड्रोक्लीज़ काँप रहा था। पर उसे दिख रहा था कि पंजा बुरी तरह सूजा हुआ है।

बहुत नरमी से उसने उसे अपने हाथों में लिया। गद्दी में गहरे एक बड़ी फाँस धँसी थी, काँटे जैसी, और उसके आसपास का घाव लाल और दुखता हुआ था। एंड्रोक्लीज़ ने जितनी सावधानी से हो सका, फाँस बाहर खींच ली। उसने घाव को दबाकर साफ़ किया और पोंछकर सुखा दिया।

शेर ने एक लंबी साँस ली। फिर वह उसके पास लेट गया, अपना पंजा उसके हाथों में रखा, और सो गया।

उस दिन से दोनों दोस्त बन गए। कहानी कहती है कि तीन साल तक एंड्रोक्लीज़ उस गुफ़ा में शेर के साथ रहा। हर दिन शेर शिकार पर जाता और अपने शिकार का सबसे अच्छा माँस उसके लिए ले आता। एंड्रोक्लीज़ उसे धूप में सुखाकर खाता, और रात को शेर साथ देने के लिए उसके पास लेटा रहता।

पकड़ा गया

आख़िरकार एंड्रोक्लीज़ उस जंगली, अकेली ज़िंदगी से ऊब गया। एक दिन, जब शेर शिकार पर गया था, वह गुफ़ा से निकला और फिर से इंसानों को ढूँढ़ने चल पड़ा।

यह ग़लती थी। तीन दिन के भीतर सिपाहियों ने उसे पकड़ लिया। उन दिनों भागे हुए ग़ुलाम को भयानक सज़ा मिलती थी। एंड्रोक्लीज़ को ज़ंजीरों में बाँधकर समुद्र पार रोम भेज दिया गया, अपने पुराने मालिक के पास, जो उस वक़्त वहीं था।

मालिक ने कड़ी सज़ा सुनाई। एंड्रोक्लीज़ को बड़े अखाड़े, सर्कस मैक्सिमस, में हज़ारों की भीड़ के सामने एक जंगली जानवर से भिड़ने के लिए छोड़ा जाना था, और ख़ुद सम्राट वहाँ देख रहे होंगे।

अखाड़ा

खेलों के दिन दर्शकों की कतारें खचाखच भरी थीं। एंड्रोक्लीज़ को अकेले रेत पर धकेल दिया गया।

दूर वाले छोर पर एक फाटक खुला। उसमें से एक शेर निकला, विशाल और जंगली, जिसे हाल ही में अफ़्रीका से पकड़कर लाया गया था। उसकी अयाल घनी थी और उसकी दहाड़ भीड़ के सारे शोर से भी ऊँची थी।

वह छलाँगें मारता हुआ अखाड़े में उसकी ओर बढ़ा।

और फिर, उसके पास पहुँचकर, वह रुक गया।

शेर बिल्कुल स्थिर खड़ा उसे देखता रहा, मानो कुछ याद कर रहा हो। फिर वह कुत्ते की तरह पूँछ हिलाता हुआ नरमी से आगे आया। उसने अपना बड़ा-सा सिर उसकी टाँगों से रगड़ा। उसके हाथ चाटे।

एंड्रोक्लीज़, जो आँखें बंद किए अपने अंत का इंतज़ार कर रहा था, ने आँखें खोलीं। उसने शेर के चेहरे में देखा। और उसे पहचान लिया।

यह उसका शेर था। गुफ़ा वाला दोस्त।

उसने उसकी गर्दन में बाँहें डाल दीं, और जो भीड़ कुछ क्रूर देखने आई थी, उसने एक आदमी और एक शेर को ऐसे गले मिलते देखा जैसे बरसों से बिछड़े पुराने दोस्त हों।

आज़ादी

भीड़ हैरानी से गरज उठी। सम्राट ने एंड्रोक्लीज़ को बुलवाया और पूछा कि ऐसा कैसे हो सकता है।

तो एंड्रोक्लीज़ ने उन्हें पूरी कहानी सुनाई: रेगिस्तान, गुफ़ा, सूजा हुआ पंजा, काँटा, और तीन साल की दोस्ती।

यह कहानी एक तख़्ती पर लिखकर पूरे दर्शक-दीर्घा में घुमाई गई, ताकि सब पढ़ सकें। लोग एक सुर में चिल्लाने लगे कि एंड्रोक्लीज़ को माफ़ कर दिया जाए और शेर उसे दे दिया जाए।

और ऐसा ही हुआ। एंड्रोक्लीज़ को आज़ाद कर दिया गया, और शेर उसका हो गया।

कहा जाता है कि उसके बाद एंड्रोक्लीज़ अक्सर रोम की गलियों में शेर को एक हल्की-सी रस्सी से बाँधे घूमता दिखाई देता था। लोग शेर पर फूल बरसाते और आदमी को पैसे देते। और जब वे गुज़रते, तो रोमवासी एक-दूसरे से कहते: यह है वह शेर जिसने एक आदमी को पनाह दी, और यह है वह आदमी जो एक शेर का डॉक्टर बना।

इस कथा के बारे में

इस कहानी का सबसे पुराना बचा हुआ रूप रोमन लेखक औलस गेलियस का है, ईसा की दूसरी सदी का। उन्होंने कहा था कि वे एक पुराने लेखक, एपियन, का विवरण दोहरा रहे हैं, जिसने दावा किया था कि उसने रोम में यह सब अपनी आँखों से होते देखा था। कोई नहीं जानता कि यह सच है या नहीं। ईसप की कथाओं में इसका एक छोटा रूप मिलता है, और तब से यह कथा बार-बार सुनाई जाती रही है। यह उसका एक छोटा और सरल किया हुआ पुनर्कथन है।

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