ईश्वर सच देखता है, पर इंतज़ार करता है
एक हँसमुख नौजवान व्यापारी मेले के लिए निकलता है और फिर कभी घर नहीं लौटता। एक ऐसी हत्या के इल्ज़ाम में, जो उसने की ही नहीं, वह छब्बीस साल साइबेरिया में बिताता है। फिर एक दिन एक नया क़ैदी आता है जो उस रात के बारे में कुछ जानता-सा लगता है। टॉल्स्टॉय की क्षमा की कहानी।
- 5 मिनट की कहानी
- Ages 13+
- Classic retold
- 1870s
ध्यान दें: इस कहानी में एक हत्या, एक बेगुनाह की क़ैद, कोड़ों की सज़ा और एक मृत्यु है।
जिस सुबह इवान अक्स्योनोव मेले के लिए निकल रहा था, उसकी पत्नी ने उससे न जाने की विनती की।
उसने कहा कि उसने सपना देखा है कि वह घर लौटा और अपनी टोपी उतारी, तो उसके बाल बिल्कुल सफ़ेद हो चुके थे।
अक्स्योनोव हँस पड़ा। यह तो शुभ शगुन है, उसने कहा। वह अपना माल अच्छे दामों पर बेचेगा और उसके लिए तोहफ़े लाएगा। और वह गाड़ी लेकर चल दिया।
सराय
अक्स्योनोव व्लादिमीर शहर का एक नौजवान व्यापारी था। उसकी दो दुकानें और एक मकान था, और वह सुंदर, सुनहरे बालों वाला और ज़िंदादिल था। जवानी में वह बहुत शराब पीता था, पर शादी के बाद उसने लगभग पूरी तरह छोड़ दी थी।
मेले के आधे रास्ते में वह एक सराय में रुका और वहाँ एक दूसरे व्यापारी से मिला जिसे वह जानता था। दोनों ने साथ चाय पी और अगल-बगल के कमरों में सोने चले गए।
अक्स्योनोव को जल्दी निकलना पसंद था। पौ फटने से पहले उसने अपने गाड़ीवान को जगाया, सराय वाले को पैसे दिए, और चल पड़ा।
चाकू
वह कुछ दूर निकल आया था और सुस्ताने और गिटार बजाने के लिए रुका था, तभी एक गाड़ी तेज़ी से आई। उसमें से एक अफ़सर दो सिपाहियों के साथ कूदा।
अफ़सर ने उससे पूछा कि उसने रात कहाँ बिताई, और क्या वह उस दूसरे व्यापारी के साथ था। अक्स्योनोव ने हैरान होकर हर बात का जवाब दिया। फिर अफ़सर ने बताया कि वह क्यों पूछ रहा है। वह दूसरा व्यापारी अपने कमरे में गला कटा हुआ पाया गया था।
सिपाहियों ने अक्स्योनोव का थैला टटोला। उसमें से एक चाकू निकला, ख़ून से सना हुआ।
अक्स्योनोव के हाथ काँपने लगे। उसे नहीं पता था कि चाकू वहाँ कैसे आया। वह बार-बार कहता रहा कि वह बेगुनाह है। पर उसकी आवाज़ काँप रही थी और चेहरा सफ़ेद पड़ गया था, और अफ़सर को यह अपराध जैसा लगा।
साइबेरिया
अक्स्योनोव को बाँधकर जेल में डाल दिया गया और उस पर मुक़दमा चला। उसे हत्या का दोषी पाया गया। उसे चाबुक से कोड़े लगाए गए, और साइबेरिया में कठोर श्रम के लिए भेज दिया गया।
जाने से पहले उसकी पत्नी को उससे मिलने दिया गया। वह बच्चों को साथ लाई। उसने ज़ार के पास अर्ज़ियाँ भेजने की बात की। और फिर धीरे से उसने पूछा कि क्या यह उसी ने किया था।
अक्स्योनोव ने अपना चेहरा छिपा लिया और रोने लगा। जब वह चली गई, तो उसने सोचा: मेरी पत्नी भी मुझ पर शक करती है। लगता है सच सिर्फ़ ईश्वर ही जान सकता है। अब से मैं सिर्फ़ ईश्वर से ही मदद माँगूँगा।
उसने किसी और से उम्मीद छोड़ दी।
छब्बीस साल
अक्स्योनोव छब्बीस साल तक साइबेरिया में क़ैदी बनकर रहा। उसके बाल बर्फ़ जैसे सफ़ेद हो गए। उसकी दाढ़ी लंबी, पतली और सफ़ेद हो गई। वह अब हँसता नहीं था। वह धीरे चलता, कम बोलता, और अक्सर प्रार्थना करता।
जेल में वह जूते बनाता था, और उन पैसों से उसने संतों के जीवन की एक किताब ख़रीदी, जिसे रोशनी होने पर वह पढ़ता। पवित्र दिनों में वह जेल की मंडली में भजन गाता।
अधिकारी उसकी नरमी की वजह से उस पर भरोसा करते थे। दूसरे क़ैदी उसे "दादा" कहते थे, और जब उनमें झगड़े होते, तो वे उन्हें सुलझाने के लिए उसके पास लाते।
नया क़ैदी
एक दिन क़ैदियों का एक नया दल आया। उनमें लगभग साठ साल का एक लंबा-तगड़ा आदमी था, सफ़ेद दाढ़ी वाला। उसका नाम माकार सेम्योनिच था, और वह अक्स्योनोव के अपने ही शहर से था।
बातों-बातों में माकार ने आधा हँसते हुए कहा कि एक बार वह उस जुर्म से कहीं बड़ा जुर्म करके बच निकला था जिसके लिए उसे यहाँ भेजा गया है। फिर उसने जैसे अक्स्योनोव का नाम पहचान लिया, और पूछा कि क्या वह एक व्यापारी को मारने के लिए यहाँ आया था।
अक्स्योनोव को अचानक पक्का यक़ीन हो गया कि यही वह आदमी है जिसने व्यापारी को मारा था, और उसके थैले में चाकू छिपाया था।
उस रात उसे नींद नहीं आई। उसे अपनी पत्नी वैसी ही दिखी जैसी वह थी, अपने बच्चे छोटे, ख़ुद को जवान और हँसता हुआ। और उसे वह सब दिखा जो उसने खो दिया था। उसके भीतर भयानक ग़ुस्सा उमड़ आया। वह बदला चाहता था, चाहे उसकी अपनी जान ही क्यों न चली जाए।
सुरंग
दो हफ़्ते तक अक्स्योनोव माकार से बचता रहा। फिर एक रात उसने देखा कि सोने के एक तख़्ते के नीचे से मिट्टी गिर रही है। माकार जेल की दीवार के नीचे सुरंग खोद रहा था, और हर दिन अपने जूतों में मिट्टी भरकर बाहर ले जाता था।
माकार ने उसे देखते हुए पकड़ लिया। उसने अक्स्योनोव से चुप रहने को कहा, वरना वह उसे मार डालेगा।
अक्स्योनोव ने उस आदमी की ओर देखा जिससे वह नफ़रत करता था और कहा कि वह उससे नहीं डरता। उसके पास खोने को कुछ नहीं बचा था।
अगले दिन पहरेदारों ने सुरंग ढूँढ़ ली। गवर्नर ने एक-एक करके क़ैदियों से पूछताछ की, और किसी ने कुछ नहीं बताया। आख़िर में वह अक्स्योनोव की ओर मुड़ा, उस बूढ़े की ओर जिसे वह ईमानदार जानता था, और उससे पूछा कि सुरंग किसने खोदी।
अक्स्योनोव ने माकार की ओर देखा। उसे बस नाम लेना था।
वह बहुत देर तक चुप रहा। फिर उसने कहा कि वह नहीं बता सकता। और गवर्नर ने जो भी कहा, उसने इससे ज़्यादा कुछ नहीं कहा।
क्षमा
उस रात, जब अक्स्योनोव जागता हुआ लेटा था, कोई आकर उसके बिस्तर के पैताने बैठ गया। वह माकार था।
फुसफुसाकर माकार ने उससे माफ़ी की भीख माँगी। उसने क़ुबूल किया कि उसी ने व्यापारी को मारा था, और अक्स्योनोव के थैले में चाकू छिपाया था। और अब, उसने कहा, जब अक्स्योनोव ने उसे पकड़वाने से इनकार कर दिया, वह यह सह नहीं पा रहा। वह सबके सामने अपना जुर्म क़ुबूल करेगा, ताकि अक्स्योनोव घर जा सके।
अक्स्योनोव ने कहा कि अब जाने को कोई घर नहीं है। उसकी पत्नी मर चुकी थी और उसके बच्चे उसे भूल चुके थे।
माकार रोने लगा और फ़र्श पर सिर पटकने लगा। फिर अक्स्योनोव भी रो पड़ा। उसने माकार से कहा कि ईश्वर उसे क्षमा करेगा। शायद, उसने कहा, वह ख़ुद उससे सौ गुना बुरा है।
और यह कहते ही उसका दिल हल्का हो गया। घर की तड़प उसके मन से चली गई। अब वह कहीं जाना नहीं चाहता था, और बस अपनी आख़िरी घड़ी का इंतज़ार करता था।
माकार ने सचमुच अपना जुर्म क़ुबूल कर लिया। पर जब तक अक्स्योनोव की रिहाई का हुक्म आया, वह मर चुका था।
इस कहानी के बारे में
लियो टॉल्स्टॉय (1828–1910) ने यह कहानी 1872 में लिखी। बरसों बाद अपने निबंध What Is Art? में उन्होंने इसे अपनी उन गिनी-चुनी रचनाओं में गिनाया जिन्हें वे अच्छी कला मानते थे। इसका शीर्षक एक पुरानी रूसी कहावत से लिया गया है। इसका सबसे जाना-माना अंग्रेज़ी अनुवाद लुईस और एल्मर मॉड का है। यह संस्करण छोटा और सरल किया गया पुनर्कथन है।