← Back to stories

For Kids

मीरा और नाकाम प्रयोग

मीरा के बीजों को संगीत सुनकर जल्दी उगना था। जब कुछ नहीं हुआ, तो उसे लगा वह हार गई, जब तक कि उसके दादाजी ने उसे नहीं दिखाया कि एक असली वैज्ञानिक इसके बाद क्या करता है।

  • 4 मिनट का पाठ
  • Ages 8–12
  • Original story
इस भाषा में पढ़ें

मीरा को पक्का यकीन था कि पौधों को संगीत पसंद होता है।

उसने यह कहीं पढ़ा था, या शायद किसी वीडियो में सुना था, और उसे यह बात बिल्कुल सही लगी। संगीत सुनकर लोग खुश हो जाते हैं, और कुत्ते भी। तो सेम के पौधे क्यों नहीं?

स्कूल के विज्ञान मेले के लिए उसने दही के छह डिब्बों में सेम के छह बीज बोए। तीन डिब्बे उसके कमरे की खिड़की पर गए, जहाँ वह हर दोपहर अपने पसंदीदा गाने बजाती थी। बाकी तीन गलियारे की खिड़की पर गए, जहाँ शांति रहती थी।

"संगीत वाले सेम जीतेंगे," उसने अपने दादाजी से कहा। "बहुत आगे निकलकर।"

उसके दादाजी, जो चालीस साल तक विज्ञान पढ़ा चुके थे, बस मुस्कुराए और बोले, "चलो देखते हैं, सेम क्या सोचते हैं।"

दसवाँ दिन

दसवें दिन मीरा अपना नापने वाला स्केल लिए रसोई में दौड़ी आई। उसका मुँह गुस्से से फूला हुआ था, जैसे काला बादल।

"यह काम नहीं किया!"

गलियारे वाले सेम लंबे और हरे थे, और उनकी पत्तियाँ छोटे-छोटे खुले हाथों जैसी थीं। कमरे वाले सेम, यानी संगीत वाले सेम, छोटे और पीले-से थे। एक तो उगा ही नहीं था।

"शांति वाले सेम जीत गए," उसने धप्प से कुर्सी पर बैठते हुए कहा। "मेरा पूरा प्रयोग बर्बाद हो गया। मेले में दिखाने को मेरे पास कुछ नहीं होगा।"

दादाजी ने अख़बार नीचे रख दिया। "बर्बाद? मीरा, इस पूरे हफ़्ते इस घर में जो कुछ हुआ, उसमें यह सबसे दिलचस्प बात है।"

"यह दिलचस्प नहीं है। यह गलत है।"

"यह हैरान करने वाला है," उन्होंने कहा। "और ये दोनों अलग बातें हैं। गलत का मतलब है हमसे कोई चूक हुई। हैरान करने वाले का मतलब है हमने कुछ ऐसा सीखा जिसकी हमें उम्मीद नहीं थी। चलो पता लगाएँ कि यह कौन-सी बात है?"

वैज्ञानिक की तरह सोचना

दोनों बीच में एक नोटबुक रखकर मेज़ पर बैठ गए।

"पहला सवाल," दादाजी ने कहा। "क्या दोनों खिड़कियाँ संगीत को छोड़कर हर बात में एक जैसी थीं?"

मीरा ने हाँ कहने के लिए मुँह खोला। फिर बंद कर लिया।

उसने अपने कमरे के बारे में सोचा। हीटर ठीक खिड़की के नीचे था, और वहाँ हमेशा गर्मी रहती थी। पर्दे अक्सर आधे बंद रहते थे, क्योंकि पढ़ते समय उसे कमरे में हल्की रोशनी अच्छी लगती थी। गलियारे की खिड़की बगीचे की ओर खुलती थी, और हर सुबह उसमें से धूप भर-भरकर आती थी।

"नहीं," उसने धीरे से कहा। "मेरा कमरा ज़्यादा गरम है। और ज़्यादा अँधेरा भी।"

"तो फ़र्क किस वजह से पड़ा होगा?"

"संगीत से… या गर्मी से… या रोशनी से।" उसकी भौंहें सिकुड़ गईं। "मैं बता नहीं सकती कि किससे।"

"बिल्कुल।" दादाजी ने नोटबुक पर उँगली से ठक-ठक किया। "वैज्ञानिक इन्हें वेरिएबल (चर) कहते हैं, यानी वे चीज़ें जो बदल सकती हैं। सही जाँच में तुम एक बार में बस एक ही चीज़ बदलते हो और बाकी सब एक जैसा रखते हो। वरना तुम पक्के तौर पर नहीं कह सकते कि नतीजा किस वजह से आया।"

फिर से कोशिश

मीरा ने हार नहीं मानी। उसने छह नए सेम बोए, और इस बार वह बहुत ध्यान से चली। सभी छह गलियारे की उसी धूप वाली खिड़की पर रखे गए, काँच से एक जितनी दूरी पर। हर डिब्बे को रोज़ एक ही समय पर, एक ही नापने वाले कप से, एक जितना पानी मिलता था।

संगीत के लिए उसने तीन डिब्बों के पास एक छोटा-सा स्पीकर रखा और हर दोपहर एक घंटे तक धीमी आवाज़ में गाने बजाए। बाकी तीन खिड़की पर काफ़ी दूर, चुपचाप रखे रहे।

वह रोज़ उन्हें नापती और एक तालिका में नंबर लिखती।

दसवें दिन तक सेम लगभग बिल्कुल एक जितने लंबे थे। संगीत वाले कुछ सेम थोड़े लंबे थे और शांति वाले कुछ सेम थोड़े लंबे, लेकिन कोई साफ़ विजेता था ही नहीं।

"तो संगीत से कुछ नहीं होता?" मीरा ने पूछा।

"छह सेमों के साथ, दस दिनों में, हमारे गलियारे में, उससे ऐसा कोई फ़र्क नहीं पड़ा जिसे हम नाप सकें," दादाजी ने कहा। "यह एक ईमानदार जवाब है। असली वैज्ञानिक कोई बात पक्के तौर पर तय करने से पहले और ज़्यादा पौधे और ज़्यादा समय चाहेंगे।"

विज्ञान मेला

मेले में मीरा की मेज़ बाकी सबसे अलग दिख रही थी। उस पर दो प्रयोग थे।

अपने पोस्टर पर सबसे ऊपर उसने लिखा था: मेरा पहला प्रयोग नाकाम रहा। उसने मुझे यह सिखाया।

उसने कमरे वाले पीले सेम दिखाए और हीटर और पर्दों के बारे में समझाया। उसने अपनी सही जाँच और नापों की तालिका दिखाई। सबसे नीचे उसने वह सबसे ज़रूरी बात लिखी जो उसने सीखी थी: एक बार में एक ही चीज़ बदलो।

जज, एक लंबी महिला जिनकी आस्तीन पर पेंट लगा था, ने पूरा पोस्टर ध्यान से पढ़ा।

"ज़्यादातर लोग उस प्रयोग को छिपा लेते हैं जो गलत हो गया," उन्होंने कहा। "तुमने उसे सबसे पहले रखा। क्यों?"

मीरा ने इस बारे में सोचा। "क्योंकि उसी ने मुझे सोचने पर मजबूर किया।"

उसे पहला इनाम नहीं मिला। उसे कुछ ऐसा मिला जिसे दादाजी ने उससे भी अच्छा बताया: एक रिबन, जिस पर लिखा था सबसे अच्छी वैज्ञानिक सोच। उसने उसे अपने बिस्तर के ऊपर टाँग दिया, ठीक सेम के एक अकेले, थोड़े टेढ़े पौधे के बगल में, जो सारी उम्मीदों के उलट, अब भी बढ़ रहा था।


खुद करके देखो: क्या तुम यह पता लगाने के लिए एक सही जाँच बना सकते हो कि पौधे धूप में अच्छे उगते हैं या छाँव में? तुम कौन-कौन सी चीज़ें एक जैसी रखोगे?

Read next

For KidsFable & folk tale

The Goose That Laid the Golden Eggs

A poor farmer and his wife find a golden egg in their goose's nest. Then another. Then another. One golden egg a day should be plenty, shouldn't it?

3 min readAges 5–9Ancient Greece
For KidsFable & folk tale

The Thirsty Crow

On the hottest day of the year, a tired crow finds a pitcher with a little water at the very bottom. Her beak can't reach it. So she thinks.

4 min readAges 4–8Ancient Greece and India
For KidsClassic retold

The Ugly Duckling

One egg in the mother duck's nest is bigger than the rest, and the chick that hatches from it looks nothing like his brothers and sisters. Nobody wants him. Not yet.

4 min readAges 5–91840s