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Kindness

बिशप के शमादान

हर सराय से ठुकराया गया एक भूखा, सज़ा काटकर लौटा क़ैदी एक दयालु बूढ़े बिशप के घर पनाह पाता है, और बदले में उन्हीं की चाँदी चुरा लेता है। विक्टर ह्यूगो के ले मिज़रेबल का मशहूर दृश्य।

  • 5 मिनट का पाठ
  • Ages 12+
  • Classic retold
  • 1810s

ध्यान दें: इस कहानी में गरीबी, जेल और चोरी का ज़िक्र है।

इस भाषा में पढ़ें

अक्टूबर 1815 में, एक लंबे दिन के आख़िर में, एक आदमी पैदल चलता हुआ फ़्रांस के दक्षिण में बसे छोटे-से क़स्बे दीन्य में पहुँचा।

वह मज़बूत कद-काठी का था, धूप और मौसम की मार से सख़्त पड़ा हुआ। उसकी टोपी चेहरे पर नीचे तक खिंची थी, हाथ में एक भारी लाठी थी और पीठ पर एक पुराना झोला। उसके कपड़े फटे-पुराने थे। उसके जूतों में छेद ही छेद थे।

उसका नाम ज्यां वालजां था। वह अभी-अभी गैली जेलों में उन्नीस साल की कड़ी मशक़्क़त काटकर छूटा था। उसका पहला जुर्म, बहुत पहले, यह था कि उसने एक नानबाई की खिड़की तोड़कर अपनी बहन के भूखे बच्चों के लिए एक रोटी चुराई थी। उसे पाँच साल की सज़ा हुई थी। बाक़ी साल भागने की उसकी कोशिशों ने जोड़ दिए थे।

अब उसके पास एक पीला पासपोर्ट था, जो हर पुराने क़ैदी को दिखाना पड़ता था। उसे पढ़ने वाले हर इंसान को साफ़ पता चल जाता था कि वह कौन है।

ठुकराया हुआ

वह सराय में गया, जहाँ आग पर गोश्त भुन रहा था। सराय वाले ने उसका पासपोर्ट एक नज़र देखा और कह दिया कि जगह नहीं है।

वह एक छोटे शराबख़ाने में गया। उन्होंने उसे बाहर निकाल दिया।

उसने जेल का दरवाज़ा खटखटाया और वहाँ सोने की इजाज़त माँगी। जेलर ने कहा कि यह सराय नहीं है: पहले गिरफ़्तार हो जाओ, फिर अंदर आ सकते हो।

वह चौक में पत्थर की एक बेंच पर लेट गया, थका-हारा और पूरी दुनिया पर ग़ुस्से से भरा हुआ। गिरजाघर से निकलती एक बूढ़ी औरत ने उससे पूछा कि वह क्या कर रहा है।

"दिखता नहीं? मैं यहाँ सोने जा रहा हूँ।"

उसने चौक के उस पार एक छोटे, नीचे-से घर की ओर इशारा किया। "क्या तुमने वह दरवाज़ा खटखटाया है?"

खुला दरवाज़ा

वह दीन्य के बिशप, मॉन्सेन्योर बिएनवेनू मिरिएल का घर था। वे एक बूढ़े आदमी थे जिन्होंने अपना लगभग सब कुछ दूसरों को दे दिया था। उन्होंने बिशप के लिए बने अपने बड़े महल को अस्पताल बना दिया था और ख़ुद बगल के छोटे-से घर में रहने आ गए थे। उनके पास ऐशो-आराम की बस इतनी चीज़ें बची थीं: चाँदी की छह प्लेटें और चम्मच, चाँदी का एक शोरबे का करछुल, और चाँदी के दो शमादान, जो उन्हें विरासत में मिले थे।

वालजां ने दरवाज़ा खटखटाया। बिशप ने कहा, "अंदर आ जाओ।"

वालजां अंदर आया और फ़ौरन, रूखेपन से बोल पड़ा, मानो सबसे बुरी बात जल्दी से निपटा देना चाहता हो। "मेरा नाम ज्यां वालजां है। मैं एक क़ैदी हूँ। मैंने उन्नीस साल गैलियों में काटे हैं। चार दिन पहले छूटा हूँ। सबने मुझे ठुकरा दिया है। यह रहा मेरा पीला पासपोर्ट। क्या आप मुझे कुछ खाने को और सोने की जगह देंगे? मैं पैसे दे सकता हूँ।"

बिशप अपनी घर सँभालने वाली की ओर मुड़े। "मादाम माग्लुआर, मेज़ पर एक जगह और लगा दीजिए।"

वालजां को लगा कि वह ठीक से समझा नहीं। उसने सब कुछ फिर से कहा। बिशप ने बस इतना कहा, "बैठ जाओ और आग ताप लो। हम थोड़ी देर में खाना खाएँगे, और जब तक तुम खाओगे, तुम्हारा बिस्तर लग जाएगा।"

घर सँभालने वाली मेहमान के लिए चाँदी के बर्तन निकाल लाई। बिशप ने चाँदी के दोनों शमादान जलाकर मेज़ पर रख दिए। उन्होंने वालजां को "मोस्यो" कहकर पुकारा। उन्होंने उससे उसके जुर्मों के बारे में कुछ नहीं पूछा। उन्होंने कहा, "यह मेरा घर नहीं है; यह ईसा मसीह का घर है। यह दरवाज़ा अंदर आने वाले से यह नहीं पूछता कि उसका कोई नाम है या नहीं, बल्कि यह पूछता है कि उसे कोई दुख है या नहीं।"

रात में

उन्नीस सालों में पहली बार वालजां कुछ घंटे एक असली बिस्तर पर सोया। रात लगभग दो बजे उसकी नींद खुल गई।

वह अँधेरे में लेटा चाँदी के बारे में सोचता रहा। उसने देखा था कि घर सँभालने वाली ने उसे कहाँ रखा था, बिशप के बिस्तर के पास एक अलमारी में। उसकी क़ीमत उससे ज़्यादा थी जितना उसने जेल की मशक़्क़त के सारे सालों में कमाया था।

वह उठा। उसने अपनी भारी लाठी ली, दबे पाँव बिशप के कमरे से गुज़रा, चैन से सोते बूढ़े के पास से होकर, अलमारी खोली और चाँदी की टोकरी उठा ली। फिर वह बगीचे की दीवार फाँदकर भाग निकला।

सुबह

अगली सुबह, जब बिशप अपने बगीचे में टहल रहे थे, तीन पुलिस वाले ज्यां वालजां का गिरेबान पकड़े दरवाज़े पर आ पहुँचे। उन्होंने उसे भागते देखकर रोका था और उसके झोले में चाँदी पाई थी।

बिशप जितनी तेज़ी से उनकी उम्र इजाज़त देती थी, उतनी तेज़ी से उनकी ओर आए।

"अरे, तुम आ गए!" उन्होंने वालजां से कहा। "तुम्हें देखकर ख़ुशी हुई। लेकिन मैंने तुम्हें शमादान भी तो दिए थे, जो बाक़ी चीज़ों की तरह चाँदी के हैं और जिनके तुम्हें दो सौ फ़्रैंक मिल जाते। तुम उन्हें अपनी प्लेटों के साथ क्यों नहीं ले गए?"

वालजां ने बूढ़े आदमी को ऐसी नज़र से देखा जिसे कोई इंसानी भाषा बयान नहीं कर सकती।

"मॉन्सेन्योर," पुलिस अफ़सर ने कहा, "तो क्या इस आदमी ने जो कहा वह सच है? हमें यह भागता हुआ मिला और हमने सोचा..."

"इसने तुमसे कहा कि यह चाँदी इसे एक बूढ़े पादरी ने दी है, जिसके यहाँ इसने रात बिताई थी? और तुम इसे वापस ले आए? यह तो ग़लती है।"

पुलिस ने वालजां को छोड़ दिया। बिशप अँगीठी के ऊपर बनी ताक़ के पास गए, चाँदी के दोनों शमादान उतारे और उसे दे दिए। वालजां सिर से पाँव तक काँप रहा था। उसने उन्हें यंत्रवत ले लिया, हक्का-बक्का-सा।

"अब शांति से जाओ," बिशप ने कहा। फिर वे पास आए और धीमी आवाज़ में बोले।

"कभी मत भूलना कि तुमने मुझसे वादा किया है कि इस चाँदी से तुम एक ईमानदार इंसान बनोगे।"

वालजां को याद ही नहीं था कि उसने कोई वादा किया हो। वह अवाक खड़ा रहा।

"ज्यां वालजां, मेरे भाई," बिशप ने गंभीरता से कहा, "अब तुम बुराई के नहीं, अच्छाई के हो। मैं तुमसे तुम्हारी आत्मा ख़रीद रहा हूँ। मैं उसे अँधेरे ख़यालों से और विनाश की भावना से निकालकर ईश्वर को सौंपता हूँ।"

एक बदला हुआ आदमी

वालजां क़स्बे से ऐसे निकला जैसे कोई भाग रहा हो। वह सारा दिन खेतों में भटकता रहा, ऐसी भावनाओं से हिला हुआ जिन्हें वह समझ नहीं पा रहा था। उन्नीस साल तक उसने अपने चारों ओर नफ़रत की एक दीवार खड़ी की थी, और वह बूढ़ा आदमी सीधा उसके आर-पार चला आया था।

उस शाम, एक सुनसान सड़क पर, चिमनी साफ़ करने वाले एक छोटे लड़के का एक सिक्का गिर गया, और वालजां ने, जो अब भी उलझा हुआ और आधा सपने में था, उस पर पैर रख दिया और लड़के को डराकर भगा दिया। जब उसे होश आया, तो उसने बच्चे को पुकारा और अँधेरे में उसे ढूँढता रहा, सिक्का लौटाने के लिए बेचैन। वह उसे नहीं मिला।

वह एक चट्टान पर बैठ गया और रो पड़ा, उन्नीस सालों में पहली बार।

ह्यूगो के उपन्यास में ज्यां वालजां आगे चलकर एक ईमानदार इंसान बनता है, एक कारख़ाने का मालिक, एक मेयर और ग़रीबों का रखवाला। वह बिशप के चाँदी के शमादान ज़िंदगी भर अपने पास रखता है। और किताब के अंत में, जब वह मरता है, उन्हीं शमादानों की मोमबत्तियाँ उसके पास जल रही होती हैं।

इस कहानी के बारे में

विक्टर ह्यूगो (1802–1885) ने ले मिज़रेबल 1862 में प्रकाशित किया। यह अब तक लिखे गए सबसे लंबे उपन्यासों में से एक है, और सबसे ज़्यादा पसंद किए जाने वालों में से भी। इसकी यह शुरुआती घटना मंच और परदे पर कई बार दोहराई गई है। यह एक छोटा किया हुआ पुनर्कथन है; बिशप के शब्द ह्यूगो के मूल पाठ के अर्थ का पालन करते हैं, जो पब्लिक डोमेन में है।

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