← Back to stories

Reflection

ख़ाली गमला

एक बूढ़े सम्राट देश के हर बच्चे को एक-एक बीज देते हैं। वे कहते हैं कि जो सबसे सुंदर फूल उगाएगा, वही उनके बाद राज करेगा। एक लड़के का बीज उगता ही नहीं।

  • 4 मिनट का पाठ
  • All ages
  • Fable & folk tale
  • Traditional China
इस भाषा में पढ़ें

बहुत पहले चीन में एक बूढ़े सम्राट थे, जिन्हें अपने राज्य में सबसे ज़्यादा प्यार फूलों से था।

उनके महल के बग़ीचे मशहूर थे। कमल के तालाबों के पास कटोरों जितने बड़े पियोनी के फूल खिलते थे। पतझड़ में रास्तों के किनारे गुलदाउदी की क़तारें होतीं। बसंत की शुरुआत में आलूबुख़ारे के फूल दीवारों को ढक लेते। सम्राट हर सुबह उनके बीच टहलते, और लोग कहते थे कि वे जिस चीज़ को छू देते, वह खिल उठती।

लेकिन सम्राट बहुत बूढ़े हो चले थे, और उनकी कोई संतान नहीं थी। उन्हें किसी ऐसे को चुनना था जो उनके बाद राज करे।

सम्राट के बीज

एक दिन देश के हर शहर और हर गाँव में एक संदेश भेजा गया। राज्य के सारे बच्चों को महल में आना था।

वे हज़ारों की तादाद में आए, शहरों से और खेतों से, पहाड़ों से और नदियों के किनारों से। उनमें पहाड़ियों के एक छोटे-से गाँव का जून नाम का एक लड़का भी था। उसका परिवार ग़रीब था, लेकिन जून में एक हुनर था: वह जो भी बोता, वह उग आता। सेम, ख़रबूज़े, फूल, यहाँ तक कि उसकी माँ के दरवाज़े के बाहर संतरे का एक छोटा-सा पेड़ भी, सब उसकी देखभाल में फलते-फूलते थे।

सम्राट बच्चों की भीड़ के सामने खड़े हुए और मुस्कुराए।

"तुममें से हर एक को मुझसे एक बीज मिलेगा," उन्होंने कहा। "इसे घर ले जाओ। इसे बोओ, पानी दो, इसकी देखभाल करो। एक साल बाद वापस आना और मुझे दिखाना कि तुमने क्या उगाया है। जिसने अपनी पूरी कोशिश की होगी, वही मेरे बाद सम्राट बनेगा।"

एक सेवक बच्चों के बीच घूमा और हर नन्ही हथेली पर एक बीज रखता गया।

जून पूरे रास्ते दौड़ता हुआ घर गया, अपने बीज को ऐसे सँभाले हुए जैसे वह कोई हीरा हो।

कुछ नहीं उगता

उसने घर का सबसे अच्छा गमला चुना। उसने उसे नदी किनारे की उपजाऊ, काली मिट्टी से भरा। उसने बीज बोया, धीरे से पानी दिया, और गमले को धूप में रख दिया।

हर सुबह वह उसे देखता।

कुछ नहीं।

कुछ हफ़्तों बाद उसने उसे ताज़ी मिट्टी वाले एक बड़े गमले में लगा दिया। उसने उसे थोड़ा ज़्यादा पानी दिया, फिर थोड़ा कम। उसने उसे ज़्यादा धूप वाली जगह रखा, फिर ज़्यादा छाँव वाली जगह। शाम को वह उसके लिए गाता, जैसे उसकी दादी अपनी सब्ज़ियों के लिए गाती थी।

फिर भी कुछ नहीं।

हफ़्ते महीनों में बदल गए। मौसम बदलते गए। पूरे गाँव में दूसरे बच्चे अपने पौधों की बातें कर रहे थे: लंबी हरी कोंपलें, चौड़े पत्ते, पहली मोटी-मोटी कलियाँ। जून का गमला दरवाज़े के पास रखा था, काली, चिकनी मिट्टी से भरा, और उसमें कुछ भी नहीं।

उसकी समझ में नहीं आ रहा था। आज तक उसका कोई बीज बेकार नहीं गया था।

वापसी

आख़िरकार साल पूरा हुआ, और महल लौटने का समय आ गया।

रास्ते में जून ने दूसरे बच्चों को अपने गमले लिए जाते देखा। उन्होंने हर रंग के फूलों वाले लंबे-लंबे पौधे उठा रखे थे, लाल और सफ़ेद, सुनहरे और गुलाबी। कुछ फूल इतने बड़े थे कि बच्चे उनके पार मुश्किल से देख पा रहे थे।

जून ने अपने ख़ाली गमले की ओर देखा, और उसकी आँखों में आँसू भर आए।

"मैं नहीं जा सकता," उसने अपने पिता से कहा। "सब मुझ पर हँसेंगे। और सम्राट सोचेंगे कि मैंने कोशिश तक नहीं की।"

उसके पिता उसके पास घुटनों के बल बैठ गए।

"मैंने तुम्हें हर एक दिन उस गमले की देखभाल करते देखा है," उन्होंने कहा। "इसमें शर्मिंदा होने जैसा कुछ नहीं है। इसे जैसा है वैसा ही महल ले जाओ, और सम्राट को ठीक-ठीक बता दो कि क्या हुआ।"

तो जून चला गया।

ख़ाली गमला

महल का आँगन फूलों का समंदर बना हुआ था। बच्चे लंबी क़तारों में खड़े थे, हर एक ने एक सुंदर पौधा ऊपर उठा रखा था, हर एक को उम्मीद थी कि उस पर नज़र पड़ेगी। जून बिल्कुल आख़िर में खड़ा था, अपना ख़ाली गमला थामे, उसका चेहरा शर्म से तप रहा था।

सम्राट फूलों को देखते हुए क़तारों के साथ-साथ धीरे-धीरे चले। वे मुस्कुराए नहीं। उन्होंने किसी से कुछ नहीं कहा।

फिर वे क़तार के आख़िर तक पहुँचे और जून के सामने रुक गए।

"तुम मेरे लिए ख़ाली गमला क्यों लाए हो?" उन्होंने पूछा।

जून की आवाज़ काँप रही थी, लेकिन उसने जवाब दिया। "महाराज, आपने जो बीज दिया था, मैंने उसे बोया। मैंने हर दिन उसे पानी दिया। मैंने उसे नई मिट्टी दी और धूप में रखा। लेकिन वह कभी उगा ही नहीं। मुझे माफ़ कीजिए। मैं इससे अच्छा नहीं कर सका।"

सम्राट देर तक उसे देखते रहे। फिर, धीरे-धीरे, उनके बूढ़े चेहरे पर एक मुस्कान फैल गई।

उन्होंने ख़ाली गमला दोनों हाथों में लिया और उसे ऊँचा उठाया ताकि सब देख सकें।

"मुझे वह मिल गया है जो मेरे बाद राज करेगा!" उन्होंने घोषणा की।

पूरे आँगन में सबकी साँस अटक गई।

"एक साल पहले," सम्राट ने कहा, "मैंने तुम सबको एक-एक बीज दिया था। लेकिन उनमें से हर बीज पकाया हुआ था। उनमें से एक भी कभी उग ही नहीं सकता था।"

बच्चे एकदम चुप हो गए। कुछ ने अपने सुंदर फूलों की ओर नज़रें झुका लीं, और उनके चेहरे लाल हो गए।

"तुम सब मेरे लिए दूसरे बीजों से उगाए पौधे लाए हो," सम्राट ने आगे कहा, अब नरमी से। "सिर्फ़ इस लड़के में मेरे सामने सच लाने की हिम्मत थी, तब भी जब वह सच एक ख़ाली गमला था। एक राजा को सबसे बढ़कर ईमानदार होना चाहिए। इसीलिए यह तुम्हारा सम्राट बनेगा।"

और इस तरह, समय आने पर, जून सम्राट बना। कहते हैं कि उसने बरसों तक समझदारी और इंसाफ़ से राज किया, और महल के बग़ीचे इतने सुंदर पहले कभी नहीं खिले थे।

इस कथा के बारे में

यह एक पारंपरिक चीनी लोककथा है, जो चीन और पूर्वी एशिया के दूसरे हिस्सों में कई रूपों में सुनाई जाती है। इसका ठीक-ठीक स्रोत पता नहीं है, और हर कहने वाले के साथ ब्योरे बदल जाते हैं, लेकिन पके हुए बीज और ईमानदारी वाला ख़ाली गमला हमेशा इसके केंद्र में रहते हैं। यह कहानी का एक छोटा और सरल किया हुआ रूप है।

Read next

ReflectionFable & folk tale

The Blind Men and the Elephant

Six men who have never seen an elephant each touch a different part of one, and each is certain he knows exactly what it is. An ancient parable from India.

3 min readAll agesAncient India
ReflectionFable & folk tale

The Golden Touch

A god offers King Midas any wish he likes, and the king already loves gold more than anything. By the next morning, everything he touches shines.

4 min readAll agesAncient Greece
ReflectionFable & folk tale

The Shortest Line

Emperor Akbar draws a line on the floor and sets his court a puzzle. Make it shorter, he says, without touching it.

4 min readAll agesMughal India, 16th century