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Life Lessons

मैजाई का तोहफ़ा

एक नौजवान जोड़ा, जिसके पास लगभग कोई पैसा नहीं, चुपके-चुपके अपना सबसे बड़ा ख़ज़ाना छोड़ देता है ताकि एक-दूसरे के लिए क्रिसमस का तोहफ़ा ख़रीद सके। ओ. हेनरी की सबसे प्यारी कहानी।

  • 4 मिनट का पाठ
  • Ages 12+
  • Classic retold
  • 1900s
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एक डॉलर और सत्तासी सेंट।

डेला के पास बस इतना ही था। उसने तीन बार गिना था, और फिर भी वह एक डॉलर और सत्तासी सेंट ही था। उसने यह एक-एक पेनी जोड़कर बचाया था, पंसारी और क़साई से इतना मोलभाव करके कि उसके गाल शर्म से जल उठते थे। और कल क्रिसमस था।

अब और कुछ करने को नहीं बचा था, सिवाय इसके कि उस पुराने, घिसे हुए छोटे सोफ़े पर बैठकर रो लिया जाए। तो डेला ने वही किया।

वह और उसका पति, जिम, न्यूयॉर्क में एक छोटे-से सजे-सजाए फ़्लैट में रहते थे, जिसका किराया आठ डॉलर हफ़्ता था। जिम को हफ़्ते के बीस डॉलर मिलते थे। उतने में कुछ नहीं होता था। और डेला किसी भी चीज़ से ज़्यादा यह चाहती थी कि जिम के लिए कुछ सुंदर ख़रीदे। कुछ ऐसा, जो उसके लायक़ हो।

दो ख़ज़ाने

डेला ने आँसू पोंछे और खिड़कियों के बीच लगे सँकरे आईने के सामने जा खड़ी हुई। फिर उसने अपने बाल खोले और उन्हें नीचे गिर जाने दिया।

अब, उस फ़्लैट में दो चीज़ें थीं जिन पर डेला और जिम को बेहद गर्व था।

एक थी जिम की सोने की घड़ी, जो पहले उसके पिता की थी, और उनसे पहले उसके दादा की।

दूसरे थे डेला के बाल। वे उसके घुटनों से भी नीचे तक आते थे, भूरे झरने की तरह लहराते और चमकते हुए। वे इतने सुंदर थे कि, जैसा ओ. हेनरी ने कहा, अगर शीबा की रानी सामने वाले घर में रहती, तो डेला उन्हें खिड़की से बाहर लटका देती, सिर्फ़ इसलिए कि रानी के गहने फीके लगें।

डेला एक लंबे पल तक अपने बालों को देखती रही। एक-दो आँसू घिसे हुए लाल क़ालीन पर गिर पड़े।

फिर उसने अपनी पुरानी भूरी जैकेट और पुरानी भूरी टोपी पहनी, और बाहर निकल गई।

बीस डॉलर

वह एक बोर्ड के पास रुकी, जिस पर लिखा था मादाम सोफ़्रोनी। हर तरह का बालों का सामान।

"क्या आप मेरे बाल ख़रीदेंगी?" डेला ने पूछा।

मादाम ने मंजे हुए हाथ से बालों के उस भारी भूरे गुच्छे को उठाया। "बीस डॉलर," उसने कहा।

"जल्दी दीजिए," डेला ने कहा।

अगले दो घंटे जैसे गुलाबी पंखों पर उड़ते हुए बीत गए। डेला ने जिम के तोहफ़े के लिए शहर की हर दुकान छान मारी, और आख़िरकार उसे वह मिल गया: उसकी घड़ी के लिए एक प्लैटिनम की चेन, सादी और सुरुचिपूर्ण, ख़ुद घड़ी के लायक़। जिम अपनी घड़ी के साथ जो पुराना चमड़े का पट्टा इस्तेमाल करता था, उस पर उसे शर्म आती थी, और वह चुपके से समय देखता था। इस चेन के साथ वह किसी के भी सामने अपनी घड़ी देख सकता था।

उसकी क़ीमत इक्कीस डॉलर थी। डेला सत्तासी सेंट लेकर जल्दी-जल्दी घर लौटी।

जिम घर आता है

घर पहुँचकर उसने अपने बचे-खुचे बालों को पूरे सिर पर छोटे-छोटे कसे हुए घुँघरों में मोड़ लिया, जब तक कि वह स्कूल से भागे किसी शरारती लड़के जैसी नहीं दिखने लगी।

"अगर जिम ने मुझे दोबारा देखने से पहले ही मार नहीं डाला," उसने आईने से कहा, "तो वह कहेगा कि मैं किसी कोरस गर्ल जैसी लग रही हूँ। लेकिन एक डॉलर और सत्तासी सेंट में मैं और कर भी क्या सकती थी?"

सात बजे तक कॉफ़ी बन चुकी थी और चॉप्स के लिए कड़ाही गरम थी। उसने सीढ़ियों पर उसके क़दमों की आहट सुनी और धीरे से एक छोटी-सी प्रार्थना की: भगवान, उसे लगे कि मैं अब भी सुंदर हूँ।

जिम अंदर आया और दरवाज़ा बंद कर दिया। वह दुबला-पतला और बहुत गंभीर था। वह सिर्फ़ बाईस साल का था, उसे एक नए ओवरकोट की ज़रूरत थी और उसके पास दस्ताने भी नहीं थे।

वह ठिठक गया। उसकी आँखें डेला पर ऐसी नज़र से टिक गईं जिसे वह पढ़ नहीं पाई। उसमें न ग़ुस्सा था, न हैरानी, न डर। वह बस एकटक देखता रहा।

"जिम, मेरे प्यारे," वह बोल पड़ी, "मुझे ऐसे मत देखो। मैंने अपने बाल कटवाकर बेच दिए, क्योंकि तुम्हें तोहफ़ा दिए बिना मैं क्रिसमस काट ही नहीं पाती। वे फिर से बढ़ जाएँगे। तुम्हें बुरा तो नहीं लगेगा न? 'मेरी क्रिसमस' कहो, जिम, और चलो ख़ुश रहें।"

"तुमने अपने बाल कटवा दिए?" उसने धीरे-धीरे पूछा, मानो उसे अभी तक ठीक से समझ न आया हो।

फिर वह जैसे किसी सम्मोहन से जागा, और उसने डेला को अपने सीने से लगा लिया। उसने अपने ओवरकोट की जेब से एक छोटा-सा पैकेट निकाला और मेज़ पर रख दिया।

कंघियाँ

डेला की गोरी उँगलियों ने डोरी और काग़ज़ नोच डाले। और फिर ख़ुशी की एक चीख़, और फिर आँसू।

क्योंकि वहाँ रखी थीं वे कंघियाँ: बग़ल और पीछे लगाने वाली कंघियों का वह सेट, जिसे डेला बहुत दिनों से ब्रॉडवे की एक दुकान की खिड़की में निहारती आई थी। सुंदर कंघियाँ, शुद्ध कछुए की खोल से बनी, किनारों पर नगों से जड़ी, ठीक उसी रंग की जो उसके सुंदर, अब ग़ायब हो चुके बालों में खिलता। वे महँगी थीं, और उसने उन्हें चाहा तो था, पर उन्हें पाने की ज़रा-सी भी उम्मीद के बिना।

उसने उन्हें अपने दिल से लगा लिया। आख़िर में उसने मुस्कुराकर ऊपर देखा और कहा, "मेरे बाल बहुत जल्दी बढ़ते हैं, जिम!"

फिर वह उछलकर खड़ी हो गई। जिम ने अभी तक अपना सुंदर तोहफ़ा नहीं देखा था। उसने बड़े उत्साह से उसे अपनी खुली हथेली पर रखकर उसकी ओर बढ़ाया।

"कमाल की है न, जिम? इसे ढूँढ़ने के लिए मैंने पूरा शहर छान मारा। अपनी घड़ी मुझे दो। मैं देखना चाहती हूँ कि उस पर यह कैसी लगती है।"

कहा मानने के बजाय, जिम सोफ़े पर धँस गया, अपने हाथ सिर के पीछे रखे और मुस्कुरा दिया।

"डेल," उसने कहा, "चलो, अपने क्रिसमस के तोहफ़े अभी सँभालकर रख देते हैं, कुछ दिन के लिए। वे अभी इस्तेमाल करने के लिए बहुत ही अच्छे हैं। मैंने तुम्हारी कंघियाँ ख़रीदने के पैसे जुटाने के लिए घड़ी बेच दी। और अब, क्यों न तुम चॉप्स चढ़ा दो।"

सबसे समझदार

मैजाई, ओ. हेनरी हमें याद दिलाते हैं, वे ज्ञानी लोग थे जो चरनी में लेटे शिशु के लिए तोहफ़े लाए थे। उन्होंने ही क्रिसमस पर तोहफ़े देने की कला शुरू की, और उनके तोहफ़े ज़रूर समझदारी भरे रहे होंगे।

और यहाँ एक फ़्लैट में दो नासमझ बच्चे थे, जिन्होंने बड़ी नासमझी से एक-दूसरे के लिए अपने घर के सबसे बड़े ख़ज़ाने छोड़ दिए।

लेकिन तोहफ़े देने वाले सब लोगों में, ओ. हेनरी ने लिखा, ये दोनों सबसे समझदार थे। यही मैजाई हैं।

इस कहानी के बारे में

ओ. हेनरी, विलियम सिडनी पोर्टर (1862–1910) का क़लमी नाम था। वे न्यूयॉर्क के आम लोगों के बारे में अपनी गर्मजोशी भरी कहानियों और उनके चौंका देने वाले अंत के लिए मशहूर हैं। यह कहानी का एक छोटा किया हुआ पुनर्कथन है; मूल कहानी पब्लिक डोमेन में है और पूरी पढ़ने लायक़ है।

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