← Back to stories

Motivation

वह लड़की जिससे कहा गया था कि वह कभी चल नहीं पाएगी

बचपन में पोलियो के बाद विल्मा रूडॉल्फ़ को अपने पैर पर लोहे का ब्रेस पहनना पड़ता था। बीस साल की उम्र में वे दुनिया की सबसे तेज़ दौड़ने वाली महिला बन गईं।

  • 3 मिनट का पाठ
  • Ages 8+
  • Biography
  • 1940s–1960s
इस भाषा में पढ़ें

विल्मा रूडॉल्फ़ का जन्म 1940 में दक्षिणी अमेरिका के टेनेसी राज्य में हुआ था। वे समय से पहले पैदा हुई थीं और बहुत छोटी-सी थीं। वे अपने पिता के बाईस बच्चों में बीसवीं थीं। उनका परिवार ग़रीब था, और वे ऐसे समय और ऐसी जगह में रहते थे जहाँ क़ानून के ज़रिए काले अमेरिकियों को गोरे अमेरिकियों से अलग रखा जाता था, स्कूलों में, अस्पतालों में, बसों में और लगभग हर जगह।

छोटी उम्र में विल्मा बार-बार बीमार पड़ती रहीं: खसरा, गलसुआ, चिकनपॉक्स, दोनों फेफड़ों का निमोनिया, स्कार्लेट बुख़ार। फिर लगभग चार साल की उम्र में उन्हें पोलियो हो गया।

ब्रेस

पोलियो एक वायरस है जो उन नसों पर हमला कर सकता है जो मांसपेशियों को चलाती हैं। उस समय इसका कोई टीका नहीं था। इससे विल्मा का बायाँ पैर कमज़ोर और टेढ़ा हो गया, और उनका पंजा अंदर की ओर मुड़ गया। डॉक्टरों ने उनके परिवार से कहा कि शायद वह कभी ठीक से चल न पाए।

विल्मा को अपने पैर पर लोहे का एक भारी ब्रेस पहनना पड़ा।

काले मरीज़ों का इलाज करने वाला सबसे नज़दीकी अस्पताल नैशविल में था, क़रीब पचास मील दूर। सालों तक उनकी माँ हफ़्ते में एक या दो बार उन्हें बस से वहाँ इलाज के लिए ले जाती रहीं। घर पर उनकी माँ और भाई-बहनों ने वे कसरतें और मालिश करना सीख लिया जो डॉक्टरों ने उन्हें दिखाई थीं, और वे बारी-बारी से दिन में कई बार उनके पैर की मालिश करते थे।

विल्मा ने बाद में बताया कि बचपन में वे अकेलापन महसूस करती थीं। वे दूसरे बच्चों के साथ दौड़-खेल नहीं पाती थीं, और बच्चे उन्हें चिढ़ाते थे। लेकिन वे ज़िद्दी भी थीं। जब कोई देख नहीं रहा होता, तो वे ब्रेस उतार देतीं और उसके बिना चलने का अभ्यास करतीं।

चर्च वाला दिन

लगभग बारह साल की होते-होते उन्होंने इतनी मेहनत कर ली थी कि अब उन्हें ब्रेस की ज़रूरत नहीं रही। उनके परिवार ने बाद में एक रविवार के बारे में बताया, जब वे बिना ब्रेस के चर्च में दाख़िल हुईं और बीच के रास्ते से चलती हुई आगे बढ़ीं, और लोग उन्हें देखते रह गए। उसके कुछ ही समय बाद उनकी माँ ने ब्रेस को लपेटा और अस्पताल वापस भेज दिया।

विल्मा सिर्फ़ चलना नहीं चाहती थीं। वे खेलना चाहती थीं। अपनी बहन की तरह उन्होंने भी बास्केटबॉल खेलना शुरू किया, और वे इतनी तेज़ और इतनी धुन की पक्की थीं कि अपने हाई स्कूल की टीम की स्टार बन गईं।

एक कोच जिसकी नज़र पड़ी

एक बास्केटबॉल टूर्नामेंट में टेनेसी स्टेट यूनिवर्सिटी के एड टेंपल नाम के एक दौड़ के कोच ने उन्हें खेलते देखा। वे युवा महिला खिलाड़ियों के लिए टाइगरबेल्स नाम का एक मशहूर कार्यक्रम चलाते थे, और उन्होंने विल्मा को गर्मियों में उनके साथ ट्रेनिंग करने के लिए बुलाया।

वे बहुत तेज़ थीं। 1956 में, सिर्फ़ सोलह साल की उम्र में, वे ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में हुए ओलंपिक खेलों में गईं और 4 × 100 मीटर रिले में काँसे का पदक जीता।

यह तो बस शुरुआत थी।

रोम, 1960

चार साल बाद, रोम के ओलंपिक खेलों के समय विल्मा रूडॉल्फ़ बीस साल की थीं। अपनी पहली दौड़ से एक दिन पहले उनका टख़ना बुरी तरह मुड़ गया। वह सूज गया, और उन्हें डर था कि शायद वे दौड़ ही न पाएँ।

वे दौड़ीं।

उन्होंने 100 मीटर की दौड़ आसानी से जीत ली। उन्होंने 200 मीटर जीती। फिर 4 × 100 मीटर रिले में, टेनेसी स्टेट की अपनी तीन साथियों के साथ, आख़िरी हिस्से में बैटन लेते समय हाथ बदलने में गड़बड़ हो गई और वे पीछे रह गईं, लेकिन फिर उन्होंने आगे की धाविकाओं को पकड़ा, उन्हें पीछे छोड़ा और दौड़ जीत ली।

तीन स्वर्ण पदक। वे एक ही ओलंपिक में ट्रैक एंड फ़ील्ड में तीन स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली अमेरिकी महिला थीं। दुनिया भर के अख़बारों ने उन्हें धरती की सबसे तेज़ महिला कहा। इटली में उन्हें "काली हिरनी" कहा गया।

घर वापसी

जब वे टेनेसी में अपने शहर क्लार्क्सविल लौटीं, तो शहर ने उनके सम्मान में एक परेड और एक भोज की योजना बनाई। विल्मा को पता चला कि शहर की ज़्यादातर चीज़ों की तरह इन समारोहों में भी काले और गोरे लोगों को अलग-अलग रखने का इरादा था।

उन्होंने कहा कि वे ऐसे किसी कार्यक्रम में नहीं जाएँगी जिसमें लोगों को इस तरह अलग रखा जाए।

शहर ने अपनी योजना बदल दी। कई लोगों के अनुसार, उनकी घर वापसी की परेड और भोज क्लार्क्सविल के इतिहास के पहले ऐसे कार्यक्रम बने जिनमें काले और गोरे लोगों ने एक साथ जश्न मनाया।

ओलंपिक के बाद

विल्मा रूडॉल्फ़ ने बाईस साल की उम्र में दौड़ से संन्यास ले लिया। वे शिक्षिका और कोच बनीं, और ग़रीब समुदायों के युवा खिलाड़ियों की मदद के लिए एक संस्था शुरू की। उन्होंने पूरे अमेरिका में बच्चों से पोलियो के बारे में, खेल के बारे में, और इस बारे में बात की कि दूसरों को यह तय न करने दें कि आप क्या कर सकते हैं।

1994 में चौवन साल की उम्र में उनका निधन हो गया। उनका पुराना हाई स्कूल, और कई ट्रैक और पार्क, आज उनके नाम पर हैं।

और पढ़ना चाहते हैं?

विल्मा रूडॉल्फ़ ने अपनी कहानी अपनी आत्मकथा Wilma में ख़ुद सुनाई है, जो उन्होंने फ़िल्मकार बड ग्रीनस्पैन के साथ मिलकर लिखी। छोटे पाठकों के लिए कैथलीन क्रल की चित्र-पुस्तक Wilma Unlimited एक बहुत पसंद की जाने वाली शुरुआत है।

Want to read more?

This story is told briefly. For the full, detailed account, these books and records go deeper:

  1. Wilma Rudolph with Bud Greenspan, Wilma: The Story of Wilma Rudolph. New American Library, 1977.
  2. Wilma Rudolph. Olympics.com (International Olympic Committee).
  3. Kathleen Krull, Wilma Unlimited: How Wilma Rudolph Became the World's Fastest Woman. Harcourt, 1996.

About this story

This is a translation of the original English story. It was prepared with AI assistance and is awaiting review by a native speaker.

This story is awaiting final editorial fact-checking. If you spot an error, please let us know.

Shared on 1Kahani for reading and awareness. All credit for the research belongs to the authors and records listed under "Want to read more?". Based on published biographies and Olympic records; no quotations have been invented.

Have a copyright concern about this story? Tell us.

Download for Kindle & e-readers

Read next

MotivationBiography

The Deaf Composer

On a spring evening in Vienna in 1824, a packed theatre heard a new symphony for the first time. The man who wrote it could not hear a single note.

4 min readAges 10+1770s–1820s
MotivationBiography

Born Again on the Mountain

In 2011, Arunima Sinha lost her leg after being thrown from a moving train. Two years later she stood on the summit of Mount Everest.

3 min readAges 12+2010s
MotivationBiography

Dancing Again

At sixteen, Sudha Chandran was a rising young classical dancer. Then an accident on the road took her leg. Everyone assumed her dancing days were over. She did not.

3 min readAges 10+1960s–1980s