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Reflection

सोने का स्पर्श

एक देवता राजा माइडस को मनचाहा वरदान देने की पेशकश करते हैं, और राजा को पहले से ही सोना सबसे ज़्यादा प्यारा है। अगली सुबह तक वह जिस चीज़ को छूता है, वह चमकने लगती है।

  • 4 मिनट का पाठ
  • All ages
  • Fable & folk tale
  • Ancient Greece
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शाम की ठंडक में राजा माइडस अपने ख़ज़ाने के कमरे में उतरे, पीछे से दरवाज़े पर ताला लगाया, और एक अकेला दीया जलाया।

हर तरफ़ से सोना उनकी ओर दमक रहा था। सोने के सिक्कों के ढेर थे, ताक़ों पर सोने के प्याले थे, खुले संदूकों से सोने की ज़ंजीरें बाहर लटक रही थीं। माइडस ने सिक्कों में उँगलियाँ फिराईं और उनकी खनक सुनी। दुनिया में यही आवाज़ उन्हें सबसे प्यारी थी।

वे पहले से ही फ़्रिजिया के सबसे अमीर राजाओं में से एक थे। लेकिन जब भी वे इस कमरे में खड़े होते, एक ही बात सोचते।

काश, मेरे पास और होता।

बग़ीचे में एक मेहमान

एक सुबह राजा के मालियों को गुलाबों के बीच एक बूढ़ा आदमी सोता हुआ मिला, बेलों में उलझा हुआ, और उसमें से शराब की तेज़ गंध आ रही थी।

वे उसे महल में ले आए, और माइडस ने उसे फ़ौरन पहचान लिया। वह साइलेनस था, शराब और हरियाली के देवता डायोनिसस का बूढ़ा गुरु और साथी। वह देवता की मस्त टोली से भटककर रास्ता भूल गया था।

माइडस कई मामलों में मूर्ख थे, लेकिन मेहमाननवाज़ी करना जानते थे। उन्होंने साइलेनस को नरम बिस्तर और एक शानदार दावत दी, और दस दिन और दस रातों तक महल संगीत से गूँजता रहा। फिर राजा ख़ुद उस बूढ़े को डायोनिसस के पास वापस ले गए।

अपने दोस्त को फिर से देखकर देवता बहुत ख़ुश हुए।

"तुमने मेरे एक प्रिय के साथ भलाई की है," डायोनिसस ने राजा से कहा। "जो चाहो माँग लो, वह तुम्हारा होगा।"

माइडस को ज़्यादा सोचने की ज़रूरत नहीं पड़ी।

"ऐसा वरदान दीजिए कि मैं जिस चीज़ को छुऊँ, वह सोना बन जाए," उन्होंने कहा।

देवता का चेहरा थम-सा गया। उन्होंने देर तक राजा की ओर देखा, जैसे उन्हें उस पर तरस आ रहा हो। लेकिन वादा तो वादा होता है।

"ऐसा ही हो," डायोनिसस ने कहा।

सब कुछ चमक उठा

माइडस जल्दी-जल्दी घर लौटे, उन्हें यक़ीन करने की हिम्मत भी नहीं हो रही थी। रास्ते में उन्होंने हाथ बढ़ाकर बलूत के एक पेड़ से एक टहनी तोड़ी।

वह उनके हाथ में सोना बन गई।

उन्होंने रास्ते से एक पत्थर उठाया। सोना। उन्होंने सड़क किनारे के एक खेत से गेहूँ की एक बाली तोड़ी, और वह सोने की एक छोटी-सी मूर्ति बन गई, जिसका हर दाना चमक रहा था। वे ज़ोर से हँस पड़े।

महल में उन्होंने बड़े दरवाज़ों को छुआ, और वे दमक उठे। उन्होंने खंभों, दीवारों, कुर्सियों पर हाथ फिराया। वे अपने बग़ीचे में गुलाबों को छूते हुए घूमे, और वे अपनी डंठलों पर ही सोने में जम गए, पूरे और चमकीले, और बिना किसी ख़ुशबू के।

शाम तक उन्हें भूख लग आई थी, और इतनी ख़ुशी से वे थक भी गए थे। वे अपनी मेज़ पर बैठे और खाना मँगवाया। सेवक रोटी, भुना हुआ मांस, फल और शराब की एक सुराही ले आए।

माइडस ने रोटी उठाई।

वह उनकी उँगलियों में सख़्त और भारी हो गई, ठंडी और चमचमाती। वे उसे घूरते रह गए। उन्होंने अंगूरों के एक गुच्छे की ओर हाथ बढ़ाया। वे सोने के मनके बन गए। उन्होंने शराब का प्याला होंठों से लगाया, और जैसे ही उसने उनके मुँह को छुआ, वह पिघले सोने की एक धार बन गई, गरम और धातु के स्वाद वाली, जिसे वे निगल नहीं सके।

माइडस ने बहुत धीरे से प्याला नीचे रख दिया।

वे ख़ज़ाने से लदी एक मेज़ पर बैठे थे, और उन्हें समझ आ गया कि वे उसका एक निवाला भी नहीं खा सकते।

बेटी

इस कहानी के कुछ रूपों में सबसे बुरा तो अभी आना बाक़ी है।

राजा की एक छोटी-सी बेटी थी, जिसे वे अपने सारे सोने से ज़्यादा प्यार करते थे, हालाँकि यह बात उन्होंने कभी ठीक से कही नहीं थी, अपने आप से भी नहीं। उस शाम वह दौड़ती हुई हॉल में आई, परेशान, क्योंकि बग़ीचे के सारे गुलाब अकड़कर अजीब-से हो गए थे।

पिता का चेहरा देखकर वह गुलाब भूल गई। वह उनके पास दौड़ी और उन्हें तसल्ली देने के लिए उनसे लिपट गई।

और जिस पल उन्होंने उसे थामा, वह स्थिर हो गई। उसका खिला हुआ चेहरा, उसके घुँघराले बाल, उसके नन्हे हाथ, सब ठंडे, चमचमाते सोने में बदल गए।

राजा चीख़ पड़े और घुटनों के बल गिर गए। उनके चारों ओर हॉल दौलत से चमक रहा था। और वे उसका एक-एक हिस्सा, हर सिक्का, हर प्याला, हर सोने का गुलाब दे देते, बस एक बार फिर अपने हाथ में बेटी का गरम हाथ महसूस करने के लिए।

नदी

उस रात माइडस रोते हुए देवता के पास वापस गए। वे भूखे थे, प्यासे थे, उनका दिल टूट चुका था, और उन्हें उसी सोने से नफ़रत हो गई थी जिसके लिए उन्होंने गिड़गिड़ाकर माँगा था।

"इसे वापस ले लीजिए," उन्होंने विनती की। "मैं मूर्ख था। अब मुझे समझ आ गया है। कृपया इसे वापस ले लीजिए।"

डायोनिसस दयालु थे।

"सार्डिस शहर के पास पैक्टोलस नदी पर जाओ," देवता ने कहा। "उसके किनारे-किनारे उसके उद्गम तक चले जाना। उस सोते में सिर से पैर तक डुबकी लगाना, और अपना वरदान धो डालना।"

माइडस गए। उन्हें चट्टानों के बीच वह सोता मिला, और वे उसके ठंडे, साफ़ पानी में उतरे। जैसे-जैसे वे नहाते गए, सोने का स्पर्श उनमें से बहकर नदी में जाने लगा, और नदी की तली की रेत झिलमिलाने लगी।

उन्होंने अपने हाथों में थोड़ा पानी भरा, और वह पानी ही रहा। उन्होंने पिया, और वह अब तक चखी हर चीज़ से मीठा था।

जिन रूपों में उनकी बेटी बदल गई थी, उनमें माइडस नदी का पानी घर ले गए और उस पर उँडेल दिया, और सोना पिघलकर बह गया, और वह उनकी बाँहों में हँसती हुई, हैरान-सी जाग उठी। और कहते हैं कि उसके बाद उन्हें सोने की ज़रा भी परवाह नहीं रही, बल्कि उन्हें सीधी-सादी, जीती-जागती चीज़ों से प्यार हो गया: रोटी, पानी, गुलाब, धूप, और वे लोग जिन्हें वे अपने सीने से लगाकर रखते थे।

इस कहानी के बारे में

राजा माइडस का मिथक प्राचीन यूनान से आता है और रोमन कवि ओविड के ज़रिए सबसे ज़्यादा जाना जाता है, जिन्होंने इसे अपनी मेटामॉर्फ़ोसिस में सुनाया, जो लगभग 8 ईस्वी में पूरी हुई। ओविड बताते हैं कि पैक्टोलस नदी की सुनहरी रेत माइडस के अपना वरदान धोने से आई। राजा की बेटी प्राचीन रूपों में नहीं है। उसे अमेरिकी लेखक नैथेनियल हॉथॉर्न ने "द गोल्डन टच" (1852) में जोड़ा, और अब बहुत-से लोग उसे कहानी का हिस्सा ही मानते हैं। यह कहानी का एक छोटा और सरल किया हुआ रूप है।

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