← Back to stories

For Kids

सोने का अंडा देने वाली हंसिनी

एक ग़रीब किसान और उसकी पत्नी को अपनी हंसिनी के घोंसले में सोने का एक अंडा मिलता है। फिर एक और। फिर एक और। हर दिन सोने का एक अंडा काफ़ी होना चाहिए, है न?

  • 3 मिनट का पाठ
  • Ages 5–9
  • Fable & folk tale
  • Ancient Greece
इस भाषा में पढ़ें

बहुत समय पहले एक किसान और उसकी पत्नी टपकती छत वाली एक छोटी-सी झोंपड़ी में रहते थे।

उनके पास कुछ मुर्ग़ियाँ थीं, एक दुबली-सी भूरी गाय थी, और एक सफ़ेद हंसिनी थी। हर सुबह किसान आँगन में जाकर देखता कि हंसिनी ने अंडा दिया है या नहीं, ताकि उन्हें नाश्ते में कुछ मिल सके।

कुछ चमकता हुआ

एक सुबह किसान ने हंसिनी के घोंसले में झाँका, और ठिठक गया।

वहाँ, पुआल में, एक अंडा था। पर वह सफ़ेद नहीं था। वह पीला था, और धूप में चमक रहा था।

उसने उसे उठाया। वह बहुत भारी था।

"अरी सुनती हो!" वह चिल्लाया। "जल्दी आओ!"

उसकी पत्नी दौड़ती हुई आई। उसने अंडे को रोशनी की ओर उठाकर देखा। उसने उसे नाख़ून से ठकठकाया। आवाज़ आई, टिन्न।

"यह सोना है," उसने फुसफुसाकर कहा। "ठोस सोना!"

वे अंडे को शहर के बाज़ार ले गए और बेच दिया। उस पैसे से उन्होंने रोटी, पनीर, गरम कंबल और नए जूते ख़रीदे। इतने पैसे बच भी गए कि उन्होंने टपकती छत भी ठीक करवा ली।

रोज़ एक अंडा

अगली सुबह किसान जल्दी-जल्दी घोंसले की ओर भागा। वहाँ सोने का एक और अंडा था।

उसके अगले दिन भी एक और था।

हर दिन, सफ़ेद हंसिनी सोने का एक अंडा देती। जल्द ही किसान और उसकी पत्नी के पास नई छत थी, नई बैलगाड़ी थी, और दोनों के लिए एक-एक बढ़िया नया कोट था। उनके पास खाने को भरपूर था। उनकी ज़रूरत से भी ज़्यादा था।

पर एक अजीब बात हुई। उनके पास जितना ज़्यादा होता गया, वे उतना ही ज़्यादा चाहने लगे।

"रोज़ एक अंडा," एक शाम किसान बड़बड़ाया। "बस एक! इस रफ़्तार से तो सचमुच अमीर बनने में बरसों लग जाएँगे।"

"मैं भी यही सोच रही थी," उसकी पत्नी ने कहा। "उस हंसिनी के अंदर तो सोना भरा होगा। हम दिन-ब-दिन एक-एक छोटे अंडे का इंतज़ार क्यों करें?"

किसान की आँखें चमक उठीं। "तुम ठीक कहती हो," उसने कहा। "कल मैं उस हंसिनी को पकड़ूँगा और सारा सोना एक साथ निकाल लूँगा।"

हंसिनी उड़ जाती है

हंसिनी खिड़की के पास अपने घोंसले में बैठी थी। उसने एक-एक शब्द सुन लिया था।

उस रात, जब किसान और उसकी पत्नी सो रहे थे, वह चुपचाप उठी। उसने अपने सफ़ेद पंख झाड़े। उसने अपने चौड़े पर फैलाए।

और जब पहाड़ियों के ऊपर पहली रोशनी आई, तो वह आँगन के ऊपर से, खेतों के ऊपर से, दूर उड़ गई, और फिर कभी नहीं लौटी।

सुबह किसान दौड़कर आँगन में आया। घोंसला ख़ाली था। न हंसिनी थी, न सोने का अंडा।

उसने खलिहान में देखा। तालाब में देखा। हर जगह देखा।

"चली गई," उसने कहा, और भारी मन से सीढ़ी पर बैठ गया। "सब चला गया।"

उसकी पत्नी उसके पास बैठ गई। बड़ी देर तक दोनों में से किसी ने कुछ नहीं कहा।

उन्होंने क्या सीखा

"हमें रोज़ सोने का एक अंडा मिलता था," आख़िरकार किसान ने कहा। "हर एक दिन। और हमारे लिए वह काफ़ी नहीं था।"

"हम सब कुछ एक साथ चाहते थे," उसकी पत्नी ने कहा। "तो अब हमें और कुछ भी नहीं मिलेगा।"

उनके पास अब भी नई छत और गरम कोट थे, इसलिए वे अब ग़रीब नहीं थे। पर वे वह सुबह कभी नहीं भूले। और जब भी वे खेतों के ऊपर किसी सफ़ेद हंसिनी को उड़ते देखते, उन्हें याद आता कि वे कितने ख़ुशक़िस्मत थे, और कितने नासमझ।

इस कहानी के बारे में

यह नीति-कथा प्राचीन यूनान के कहानीकार ईसप की मानी जाती है। आज भी जब कोई ज़्यादा लालच में आकर किसी अच्छी चीज़ को खोने का जोखिम उठाता है, तो लोग कहते हैं, "सोने का अंडा देने वाली मुर्ग़ी को मत मारो।" पुराने संस्करणों में कहानी हंसिनी के लिए दुखद ढंग से ख़त्म होती है। यह संस्करण छोटे पाठकों के लिए छोटा और नरम किया गया पुनर्कथन है।

Read next

For KidsFable & folk tale

The Thirsty Crow

On the hottest day of the year, a tired crow finds a pitcher with a little water at the very bottom. Her beak can't reach it. So she thinks.

4 min readAges 4–8Ancient Greece and India
For KidsFable & folk tale

The Town Mouse and the Country Mouse

A plain little country mouse visits her grand cousin in the big town, where the food is fancy and the plates are silver. But there is something the town mouse forgot to mention.

3 min readAges 4–8Ancient Greece
For KidsFable & folk tale

The Lion and the Mouse

A mighty lion laughs when a tiny mouse promises to repay his kindness one day. Then the hunters' net falls.

3 min readAges 4–8Ancient Greece