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Motivation

राजा और मकड़ी

हारे हुए, दुश्मनों से बचते-छिपते और एक गुफा में पनाह लिए स्कॉटलैंड के राजा रॉबर्ट द ब्रूस हिम्मत छोड़ने वाले थे। तभी उन्होंने एक मकड़ी को कोशिश करते, नाकाम होते और फिर से कोशिश करते देखा।

  • 3 मिनट का पाठ
  • Ages 8+
  • Fable & folk tale
  • 1300s
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सन 1306 में रॉबर्ट द ब्रूस को स्कॉट्स का राजा बनाया गया। कुछ ही महीनों में ऐसा लगने लगा कि वे सब कुछ खो चुके हैं।

स्कॉटलैंड और इंग्लैंड के बीच युद्ध चल रहा था। इंग्लैंड का राजा एडवर्ड प्रथम, जो एक ताक़तवर और बेरहम शासक था, स्कॉटलैंड को अपने क़ब्ज़े में करने पर तुला था, और उसने नए राजा को कुचलने के लिए अपनी सेनाएँ उत्तर की ओर भेजीं।

मेथवेन की लड़ाई में रॉबर्ट की छोटी-सी सेना हार गई। फिर वह दोबारा हारी। उनके साथी तितर-बितर हो गए। उनके कई भाई पकड़े गए और उन्हें मौत की सज़ा दे दी गई। उनकी पत्नी, बेटी और बहनें बंदी बना ली गईं। ख़ुद रॉबर्ट भगोड़े बन गए, जिनके सिर पर इनाम था और जिन्हें पहाड़ियों और द्वीपों में ढूँढा जा रहा था।

गुफा

किंवदंती कहती है कि एक सर्दी में रॉबर्ट एक गुफा में, या शायद किसी टूटी-फूटी झोंपड़ी में, अकेले छिपे थे, बारिश से भी और अपने दुश्मनों से भी।

वे ठंड से ठिठुर रहे थे, भूखे थे और थककर चूर थे। कहा जाता है कि वे अंग्रेज़ों से छह लड़ाइयाँ लड़ चुके थे, और हर एक में हारे थे। वे पुआल के एक ढेर पर लेटे ख़ुद से पूछ रहे थे कि क्या उन्हें लड़ाई छोड़ देनी चाहिए। शायद उन्हें हमेशा के लिए स्कॉटलैंड छोड़ देना चाहिए और इसके बजाय पवित्र भूमि में जाकर लड़ना चाहिए।

वहाँ लेटे-लेटे सोचते हुए उनकी नज़र अपने ऊपर एक मकड़ी पर पड़ी।

छह कोशिशें

मकड़ी अपना जाला बनाने की कोशिश कर रही थी। वह एक शहतीर से एक पतले धागे पर झूलती, ताकि बीच की ख़ाली जगह पार करके दूसरे शहतीर तक पहुँच जाए और वहाँ अपना धागा जमा सके।

वह झूली, और चूक गई।

वह फिर ऊपर चढ़ी और दोबारा झूली। और फिर चूक गई।

रॉबर्ट देखते रहे। छह बार उस नन्ही मकड़ी ने उस पार झूलने की कोशिश की। छह बार वह नाकाम होकर वापस गिर गई।

रॉबर्ट के मन में बात कौंधी कि मकड़ी ने ठीक उतनी ही बार कोशिश की थी, जितनी बार वे लड़कर हारे थे।

कहानी के अनुसार उन्होंने सोचा, "अब मैं इस मकड़ी से राह लूँगा। अगर यह सातवीं बार कोशिश करती है और कामयाब होती है, तो मैं स्कॉटलैंड में एक बार फिर अपनी क़िस्मत आज़माऊँगा। अगर यह नाकाम होती है, तो मैं हार मान लूँगा और चला जाऊँगा।"

सातवीं बार

मकड़ी ने ख़ुद को समेटा और सातवीं बार झूली।

इस बार धागा शहतीर पर अटक गया। मकड़ी ने अपना धागा जमाया और जाला बुनने लगी।

रॉबर्ट पुआल पर से उठ खड़े हुए। उन्होंने तय किया कि वे हार नहीं मानेंगे।

फिर क्या हुआ

इसके बाद जो हुआ, वह इतिहास है, किंवदंती नहीं।

रॉबर्ट ने अपने साथियों को फिर से इकट्ठा किया। उन्होंने एक नए तरह का युद्ध लड़ा। बड़ी अंग्रेज़ सेनाओं से खुले मैदान में भिड़ने के बजाय उन्होंने अचानक हमलों, छापों और घात लगाकर किए गए हमलों का सहारा लिया। एक-एक करके उन्होंने पूरे स्कॉटलैंड में क़िले जीत लिए।

1307 में राजा एडवर्ड प्रथम की मौत हो गई, जब वह उनसे फिर लड़ने के लिए उत्तर की ओर जा रहा था। उसका बेटा एडवर्ड द्वितीय उतना क़ाबिल सेनापति नहीं था।

जून 1314 में स्टर्लिंग क़िले के पास, बैनॉकबर्न की लड़ाई में रॉबर्ट द ब्रूस का सामना एक कहीं बड़ी अंग्रेज़ सेना से हुआ। दो दिनों की लड़ाई में स्कॉट्स ने एक मशहूर जीत हासिल की।

इसके बाद भी युद्ध सालों तक चलता रहा। लेकिन 1328 में इंग्लैंड ने आख़िरकार स्कॉटलैंड को एक स्वतंत्र राज्य मान लिया, और रॉबर्ट द ब्रूस को उसका राजा।

क्या मकड़ी वाली बात सच है?

कोई नहीं जानता। यह कहानी रॉबर्ट के अपने समय के किसी दस्तावेज़ में नहीं मिलती। यह 1828 में मशहूर हुई, जब सर वॉल्टर स्कॉट ने इसे Tales of a Grandfather में सुनाया, जो स्कॉटलैंड का इतिहास था और जिसे उन्होंने अपने पोते के लिए लिखा था। स्कॉट ने ख़ुद लिखा कि यह एक परंपरा से चली आ रही कहानी है, और ऐसी ही एक कहानी एक और स्कॉटिश नेता, जेम्स डगलस, के बारे में भी सुनाई जाती थी।

लेकिन इस कहानी से अक्सर जोड़ी जाने वाली कहावत, अगर पहली बार में कामयाबी न मिले, तो कोशिश करो, फिर से कोशिश करो, तब से बच्चों को बार-बार सुनाई जाती रही है। और कहा जाता है कि इसके बाद कई पीढ़ियों तक ब्रूस नाम वाले बहुत-से लोग मकड़ी को मारने से इनकार करते थे।

और पढ़ना चाहते हैं?

सर वॉल्टर स्कॉट की Tales of a Grandfather ऑनलाइन मुफ़्त में पढ़ी जा सकती है। रॉबर्ट द ब्रूस के असली इतिहास के लिए माइकल पेनमैन की जीवनी Robert the Bruce: King of Scots एक विस्तृत आधुनिक विवरण है।

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