वह चूहा जिसने एक स्टूडियो बचाया
वॉल्ट डिज़्नी का पहला स्टूडियो दिवालिया हो गया। दूसरे ने एक ही मीटिंग में अपना सबसे मशहूर किरदार और लगभग सारे कलाकार गँवा दिए। घर लौटती लंबी रेल यात्रा में उन्हें एक नए विचार की ज़रूरत थी, और वह भी जल्दी।
- 4 मिनट का पाठ
- Ages 10+
- Biography
- 1900s–1930s
1928 के वसंत में, एक नौजवान और उनकी पत्नी न्यूयॉर्क से पश्चिम की ओर कैलिफ़ोर्निया जा रही एक ट्रेन में बैठे थे। खिड़की के बाहर विशाल देश पीछे छूटता जा रहा था।
वे न्यूयॉर्क अपने कार्टूनों के लिए थोड़े ज़्यादा पैसे माँगने आए थे। वे ख़ाली हाथ घर लौट रहे थे। उन्होंने अपना सबसे मशहूर किरदार खो दिया था, और उसे बनाने वाले ज़्यादातर कलाकार भी।
उनका नाम था वॉल्ट डिज़्नी। वे छब्बीस साल के थे, और यह दूसरी बार था जब उनका कारोबार डूब गया था।
अख़बार वाला लड़का
वॉल्टर इलियास डिज़्नी का जन्म 5 दिसंबर 1901 को शिकागो में हुआ था। जब वे छोटे थे, उनका परिवार मिज़ूरी के मार्सलीन के पास एक खेत पर जा बसा, जहाँ उन्हें जानवर और खुले मैदान बहुत अच्छे लगते थे, और जहाँ उन्होंने पहली बार चित्र बनाना शुरू किया।
खेत ज़्यादा दिन नहीं चला, और परिवार कैनसस सिटी चला गया। वहाँ वॉल्ट के सख़्त पिता अख़बार बाँटने का एक रूट चलाते थे, और वॉल्ट और उनके बड़े भाई रॉय को हाथ बँटाना पड़ता था। बरसों तक वॉल्ट गर्मियों की तपिश और सर्दियों की बर्फ़ में, पौ फटने से बहुत पहले उठकर अख़बार बाँटते रहे। बाद में उन्होंने कहा कि बड़े होने के बाद भी कभी-कभी उन्हें इसके बुरे सपने आते थे।
उन्हें सबसे ज़्यादा चित्र बनाना पसंद था, और जब भी मौक़ा मिलता, वे आर्ट की क्लास लेते।
पहली नाकामी
पहले विश्वयुद्ध के बाद वॉल्ट को कैनसस सिटी के एक कमर्शियल आर्ट स्टूडियो में काम मिला, जहाँ उनकी मुलाक़ात अब आइवर्क्स नाम के एक शांत, हुनरमंद नौजवान कलाकार से हुई। दोनों दोस्त और साझेदार बन गए।
वॉल्ट को एनिमेशन, यानी चित्रों को चलता-फिरता बनाने की कला, ने मोह लिया। 1921 में उन्होंने लाफ़-ओ-ग्राम नाम का अपना छोटा-सा स्टूडियो शुरू किया, जो परीकथाओं पर छोटे कार्टून बनाता था। उन्होंने जोश और विचारों से भरे नौजवान कलाकारों को काम पर रखा।
लेकिन वॉल्ट फ़िल्में बनाने में जितने अच्छे थे, पैसा सँभालने में उतने नहीं। जो कंपनी उनके कार्टून बाँटती थी, वह उन्हें पैसे दिए बिना ही बंद हो गई। लाफ़-ओ-ग्राम के पैसे ख़त्म हो गए और 1923 में वह दिवालिया हो गया। कुछ समय तक वॉल्ट इतने तंगहाल रहे कि अपने दफ़्तर में ही सोते थे और जो सस्ता मिल जाता, वही खाते थे।
उन्होंने अपना कैमरा बेचा, ट्रेन का टिकट ख़रीदा, और सूटकेस में बहुत थोड़ा सामान लेकर हॉलीवुड चले गए।
ख़रगोश
लॉस एंजेलिस में वॉल्ट और रॉय ने 1923 में मिलकर एक नया स्टूडियो शुरू किया। सधे हुए और सावधान रॉय पैसों का हिसाब देखते थे। वॉल्ट कहानियाँ देखते थे। जल्दी ही अब आइवर्क्स भी उनके साथ आ गए।
उन्होंने ऐसी छोटी फ़िल्में बनाईं जिनमें एक असली लड़की कार्टून किरदारों के साथ दिखती थी। फिर 1927 में उन्होंने न्यूयॉर्क के एक वितरक के लिए ओस्वाल्ड द लकी रैबिट नाम का एक ख़ुशमिज़ाज कार्टून किरदार बनाया। ओस्वाल्ड लोगों को पसंद आया, और आख़िरकार हालात अच्छे चलने लगे। वॉल्ट ने लिलियन बाउंड्स से शादी की, जो स्टूडियो में स्याही से रंग भरने वाली कलाकार के तौर पर काम कर चुकी थीं।
1928 की शुरुआत में वॉल्ट एक नए कॉन्ट्रैक्ट पर बात पक्की करने न्यूयॉर्क गए। लेकिन वितरक ने उन्हें ज़्यादा नहीं, बल्कि कम पैसे की पेशकश की। फिर झटका लगा। वितरक ने बताया कि उसने चुपचाप वॉल्ट के ज़्यादातर एनिमेटरों को अपने यहाँ रख लिया है। और पुराने कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक़ ओस्वाल्ड के अधिकार वॉल्ट के नहीं, बल्कि फ़िल्म कंपनी के थे।
वॉल्ट रुककर कम पैसों में काम कर सकते थे, अपने ही स्टूडियो पर क़ाबू के बिना। या फिर वे सब छोड़कर चल सकते थे और ओस्वाल्ड को खो सकते थे।
वे सब छोड़कर चल दिए।
ट्रेन में एक चूहा
घर लौटती ट्रेन में उन्हें एक नए किरदार की ज़रूरत थी, ऐसा किरदार जिसके मालिक वे ख़ुद हों।
बाद में वॉल्ट जो क़िस्सा सुनाते थे, उसके मुताबिक़ उसी सफ़र में उन्हें एक चूहे का ख़याल आया, और वे उसका नाम मॉर्टिमर रखना चाहते थे। कहते हैं कि लिलियन को यह नाम कुछ ज़्यादा ही भारी-भरकम लगा और उन्होंने इसके बजाय मिकी नाम सुझाया। इतिहासकार बताते हैं कि इस किरदार के जन्म का ब्योरा अलग-अलग क़िस्सों में अलग-अलग है, और असल डिज़ाइन और चित्रांकन का ज़्यादातर काम अब आइवर्क्स ने किया था। इतना तय है कि लॉस एंजेलिस लौटकर वॉल्ट, रॉय, अब आइवर्क्स और वफ़ादार बने रहे गिने-चुने कलाकारों ने चुपके-चुपके इस नए किरदार पर काम किया।
मिकी माउस के उनके पहले दो कार्टून मूक थे, और कोई वितरक उन्हें लेना नहीं चाहता था। वॉल्ट ने हार नहीं मानी। रिकॉर्ड की हुई आवाज़ वाली पहली फ़िल्में अभी-अभी आनी शुरू हुई थीं। वॉल्ट ने तय किया कि मिकी के तीसरे कार्टून में संगीत और आवाज़ें होंगी, जो परदे पर हो रही हरकतों से बिल्कुल मेल खाएँगी। यह जोखिम भरा और महँगा विचार था, और स्टूडियो के पास बहुत कम पैसा बचा था।
फ़िल्म का नाम था Steamboat Willie। वह 18 नवंबर 1928 को न्यूयॉर्क में रिलीज़ हुई। दर्शकों ने ऐसा कुछ पहले कभी नहीं देखा था: एक कार्टून जो सीटी बजाता था, संगीत बजाता था और हर आवाज़ की ताल पर हिलता-डुलता था। फ़िल्म बड़ी कामयाब रही।
उसके बाद
मिकी माउस ने स्टूडियो को बचा लिया। उससे हुई कमाई से वॉल्ट प्रयोग करते रहे: रंगों के साथ, संगीत के साथ, और 1937 में Snow White and the Seven Dwarfs के साथ, जो अमेरिका में बनी पहली पूरी लंबाई की एनिमेटेड फ़ीचर फ़िल्म थी। रिलीज़ से पहले लोग इसे "डिज़्नी की बेवक़ूफ़ी" कहते थे। यह अपने ज़माने की सबसे कामयाब फ़िल्मों में से एक बनी।
वॉल्ट डिज़्नी के साथ काम करना आसान नहीं था, और रास्ते में उन्होंने ग़लतियाँ भी कीं। लेकिन ओस्वाल्ड का सबक़ वे कभी नहीं भूले। उसके बाद से उनके स्टूडियो के बनाए किरदार स्टूडियो के ही होते थे।
15 दिसंबर 1966 को उनका निधन हो गया। ट्रेन में जन्मा वह चूहा आज भी पूरी दुनिया में जाना जाता है।
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नील गैबलर की Walt Disney एक विस्तृत, संतुलित जीवनी है। बॉब थॉमस की Walt Disney: An American Original एक पुराना, आत्मीय ब्योरा है, जो परिवार के सहयोग से लिखा गया था। सैन फ़्रांसिस्को का वॉल्ट डिज़्नी फ़ैमिली म्यूज़ियम उनकी अपनी चिट्ठियों और चित्रों के ज़रिए उनकी कहानी सुनाता है।