वह बूढ़ा जिसका घोड़ा खो गया
उसका घोड़ा भाग जाता है, और पड़ोसी कहते हैं, कितनी बदक़िस्मती है। बूढ़ा बस इतना कहता है, "कौन जाने?" अच्छी और बुरी क़िस्मत के बारे में चीन की एक प्राचीन कहानी।
- 3 मिनट का पाठ
- Ages 8+
- Fable & folk tale
- Ancient China
बहुत समय पहले, चीन की उत्तरी सरहद के पास, जहाँ खेत ख़त्म होते थे और दूर तक फैले घास के मैदान शुरू होते थे, एक बूढ़ा अपने बेटे के साथ रहता था।
गाँव में वह बूढ़ा दो बातों के लिए जाना जाता था: घोड़ों की उसकी परख, और उसका ठहराव। कुछ भी हो जाए, वह कभी हैरान नहीं दिखता था।
उनके पास एक ही घोड़ा था, बढ़िया और तगड़ा, और वही उनकी सबसे क़ीमती चीज़ था।
घोड़ा भाग जाता है
एक सुबह वे जागे तो देखा कि फाटक खुला है और घोड़ा ग़ायब है। उसके खुरों के निशान सरहद के पार उत्तरी क़बीलों के इलाक़े की ओर जा रहे थे। उसे वापस पाने की कोई उम्मीद नहीं थी।
पड़ोसी उसे दिलासा देने आए।
"कितनी बुरी क़िस्मत है," उन्होंने कहा। "तुम्हारा इकलौता घोड़ा! अब हल कैसे चलाओगे? माल बाज़ार तक कैसे ले जाओगे?"
बूढ़े ने बस कंधे उचका दिए।
"कौन जाने?" उसने कहा। "शायद यह बुरी क़िस्मत हो। शायद अच्छी हो।"
पड़ोसियों ने एक-दूसरे की ओर देखा और सिर हिलाते हुए घर लौट गए।
घोड़ा लौट आता है
कुछ महीने बाद गाँव के बाहर बड़ा शोर हुआ। बूढ़े का घोड़ा घर लौट आया था। और वह अकेला नहीं आया था। उसके साथ-साथ उत्तर के कई जंगली घोड़े दौड़ते आ रहे थे, तगड़े और सुंदर, जो उसके पीछे-पीछे सीधे आँगन में चले आए।
पड़ोसी फिर दौड़े-दौड़े आए।
"कितनी अच्छी क़िस्मत है!" उन्होंने कहा। "तुमने एक घोड़ा खोया, और अब तुम्हारे पास कितने सारे हैं! तुम तो अमीर हो गए!"
बूढ़े ने अपने घोड़े की नाक सहलाई।
"कौन जाने?" उसने कहा। "शायद यह अच्छी क़िस्मत हो। शायद बुरी हो।"
बेटे का गिरना
बूढ़े के बेटे को नए घोड़े बहुत पसंद थे, और वह हर दिन उन्हें सधाने में लगा रहता। वह अच्छा घुड़सवार था, लेकिन उनमें से एक जंगली घोड़ा कुछ ज़्यादा ही जंगली था। वह अगली टाँगों पर खड़ा हुआ और उसने बेटे को पटक दिया, और वह इतनी बुरी तरह गिरा कि उसकी टाँग टूट गई। वह टाँग कभी ठीक से नहीं जुड़ी, और उसके बाद से वह लँगड़ाकर चलने लगा।
पड़ोसी एक बार फिर आए।
"कितनी भयानक क़िस्मत है," उन्होंने कहा। "तुम्हारा इकलौता बेटा, उम्र भर के लिए लँगड़ा! अब खेत में तुम्हारा हाथ कौन बँटाएगा? यह सब उन्हीं घोड़ों की वजह से हुआ।"
बूढ़ा अपने बेटे के बिस्तर के पास बैठा था।
"कौन जाने?" उसने कहा। "शायद यह बुरी क़िस्मत हो। शायद अच्छी हो।"
युद्ध
लगभग एक साल बाद उत्तरी क़बीले बड़ी तादाद में सरहद पार कर आए। युद्ध छिड़ गया था। अफ़सर घोड़ों पर सवार होकर हर गाँव में गए, और लड़ सकने वाले सारे जवानों को अपने साथ ले गए।
सरहद पर लड़ाइयाँ बहुत भयानक थीं। कहते हैं कि उस इलाक़े से जो जवान लड़ने गए, उनमें से हर दस में से नौ घर नहीं लौटे।
लेकिन बूढ़े का बेटा, अपनी लँगड़ाहट की वजह से, नहीं ले जाया गया। वह घर पर ही रहा, और वह और उसके पिता, दोनों साथ-साथ बच गए।
इस बार पड़ोसी नहीं आए। लेकिन वे समझ गए थे।
कहावत
चीन में यह छोटी-सी कहानी इतनी मशहूर है कि यह चार अक्षरों की एक कहावत बन गई है: साई वेंग शी मा, यानी "सरहद पर रहने वाले बूढ़े का घोड़ा खो जाता है।" जब कुछ बुरा होता है, तो लोग एक-दूसरे को यह याद दिलाने के लिए यह कहते हैं कि कोई मुसीबत आगे चलकर छिपा हुआ वरदान भी साबित हो सकती है।
इसका लंबा रूप एक सवाल जोड़ता है: बूढ़े का घोड़ा खो गया, लेकिन कोई कैसे जान सकता था कि यह अच्छी क़िस्मत नहीं थी?
इस कहानी के बारे में
यह कहानी हुआइनान्ज़ी से ली गई है, जो दर्शन की एक किताब है और लगभग 139 ईसा पूर्व में हुआइनान के राजकुमार लियू आन के दरबार में संकलित की गई थी। मूल कहानी बहुत छोटी है, बस कुछ ही पंक्तियों की। दो हज़ार से ज़्यादा सालों से इसे बार-बार सुनाया जाता रहा है, और यह रूप, जिसमें संवाद जोड़े गए हैं, उसी कहानी की एक खुली पुनर्कथा है।