पौधों का डॉक्टर
जॉर्ज वॉशिंगटन कार्वर ग़ुलामी में पैदा हुए और बचपन में ही चुरा लिए गए। बड़े होकर वे ऐसे वैज्ञानिक बने जिन्होंने दक्षिण अमेरिका के ग़रीब किसानों को अपनी थकी हुई ज़मीन को ठीक करना सिखाया।
- 4 मिनट की कहानी
- Ages 10+
- Biography
- 1860s–1940s
ध्यान दें: इस कहानी में ग़ुलामी, एक माँ और बच्चे के अपहरण, और नस्लीय भेदभाव का ज़िक्र है।
पड़ोसी उसे पौधों का डॉक्टर कहते थे।
वह बस एक लड़का था, छोटा-सा, अक्सर बीमार रहने वाला, पतली और धीमी आवाज़ वाला। लेकिन अगर किसी का गुलाब का पौधा मुरझा रहा हो, या सब्ज़ियों की क्यारी उग न रही हो, तो मिज़ूरी के डायमंड के आसपास के खेतों के लोग उसे उसके पास ले आते। जंगल में उसका एक छिपा हुआ बग़ीचा था, जहाँ वह पौधे उगाता और घंटों उन्हें ध्यान से देखता। ऐसा लगता था जैसे उसे पता हो कि हर पौधे को क्या चाहिए।
उसका नाम जॉर्ज था, और उसने अपनी ज़िंदगी लगभग कुछ भी नहीं से शुरू की थी, यहाँ तक कि उसका अपना कोई पारिवारिक नाम भी नहीं था।
रात में चुराया गया
जॉर्ज ग़ुलामी में पैदा हुआ, शायद 1864 में, मिज़ूरी में मोज़ेज़ और सूज़न कार्वर के खेत पर। किसी ने तारीख़ लिखकर नहीं रखी। उसकी माँ मैरी कार्वर परिवार की ग़ुलाम थीं।
जब जॉर्ज छोटा बच्चा था, रात में कुछ हमलावर आए और मैरी और उनके नन्हे बेटे को उठा ले गए। मोज़ेज़ कार्वर ने एक पड़ोसी को उनके पीछे भेजा। पड़ोसी को बच्चा मिल गया, बीमार और कमज़ोर, और वह उसे वापस ले आया। मैरी कभी नहीं मिलीं।
1865 में अमेरिका में ग़ुलामी ख़त्म हुई। जॉर्ज और उसके बड़े भाई जिम को मोज़ेज़ और सूज़न कार्वर ने पाला, और उन्होंने उन्हीं का उपनाम अपना लिया। जॉर्ज खेत के भारी काम के लिए बहुत कमज़ोर था, इसलिए वह घर और बग़ीचे में हाथ बँटाता, और उसने खाना बनाना, सिलाई करना और कपड़े धोना सीखा। उसने पौधों के बारे में जो कुछ सीख सकता था, ख़ुद ही सीखा।
स्कूल तक का लंबा रास्ता
वहाँ का स्कूल काले बच्चों को नहीं लेता था। इसलिए जब जॉर्ज लगभग ग्यारह साल का था, वह पैदल लगभग दस मील दूर नियोशो शहर गया, ताकि वहाँ काले बच्चों के एक स्कूल में पढ़ सके। शुरू में वह एक खलिहान में सोया। फिर एक काले दंपती, मराया और एंड्रयू वॉटकिन्स, ने उसे अपने घर में रख लिया, और बदले में वह उनके घर का काम करता था।
उसके बाद बरसों तक वह एक शहर से दूसरे शहर जाता रहा। कभी रसोइए का, कभी धोबी का, कभी खेत-मज़दूर का काम करता, और जहाँ भी हो सके, स्कूल जाता।
एक बार कैनसस के एक कॉलेज ने उसे चिट्ठी भेजकर दाख़िला दे दिया। जब वह पहुँचा और उन्होंने देखा कि वह काला है, तो उसे लौटा दिया।
उसने हार नहीं मानी। 1890 में उसने आयोवा के सिम्पसन कॉलेज में कला और संगीत पढ़ने के लिए दाख़िला लिया; वह पौधों और फूलों के चित्र बहुत सुंदर बनाता था। वहाँ एक टीचर ने देखा कि वह पौधों के बारे में कितना जानता है, और उसे विज्ञान पढ़ने का हौसला दिया। वह आयोवा स्टेट एग्रीकल्चरल कॉलेज चला गया, जहाँ वह पहला काला छात्र बना, और बाद में पहला काला शिक्षक। 1894 में उसने डिग्री ली, और 1896 में मास्टर्स की डिग्री।
टस्कगी का बुलावा
उसी साल अलाबामा में काले छात्रों के कॉलेज, टस्कगी इंस्टीट्यूट, के संस्थापक बुकर टी. वॉशिंगटन ने कार्वर को वहाँ आकर खेती से जुड़े काम की अगुवाई करने का न्योता दिया। कार्वर आयोवा में रह सकते थे, जहाँ उनकी इज़्ज़त थी। उन्होंने दक्षिण जाना चुना, उन लोगों के बीच काम करने के लिए जिन्हें मदद की सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी।
उन्होंने पाया कि ज़मीन थक चुकी थी। पीढ़ियों से उन्हीं खेतों में साल-दर-साल कपास उगाई जाती रही थी, और कपास ने मिट्टी की सारी ताक़त चूस ली थी। बहुत-से किसान ग़रीब काले परिवार थे, जो ख़ुद ग़ुलाम रह चुके थे, या जिनके माँ-बाप रहे थे, और जो अब छोटे-छोटे खेत किराए पर लेकर क़र्ज़ में और गहरे डूबते जा रहे थे।
मिट्टी का इलाज
कार्वर का जवाब सीधा और धीरज भरा था। उन्होंने किसानों को फ़सलें बदल-बदलकर उगाना सिखाया: एक साल कपास, और दूसरे सालों में मूँगफली, शकरकंद और लोबिया जैसे पौधे। ये पौधे मिट्टी में ताक़त, ख़ासकर नाइट्रोजन, वापस डालते थे। इनसे परिवारों को खाने को भी मिलता था।
ज़्यादातर किसान कॉलेज नहीं आ सकते थे, इसलिए कार्वर उनके पास गए। उन्होंने एक गाड़ी में औज़ार, बीज और नमूने भरे और उसे एक खेत से दूसरे खेत तक ले गए, पहियों पर चलता एक स्कूल। उन्होंने आसान पर्चे भी लिखे, काम की सलाह और खाना बनाने की विधियों से भरे, जिन्हें कोई भी पढ़ सकता था।
लेकिन अगर सब मूँगफली उगाने लगें, तो उसे ख़रीदेगा कौन? इसलिए कार्वर ने अपनी प्रयोगशाला में मूँगफली और शकरकंद के नए-नए इस्तेमाल खोजे। उन्होंने खाने की चीज़ों से लेकर रंगों और सौंदर्य-प्रसाधनों तक, सैकड़ों उत्पाद और विधियाँ तैयार कीं। आम धारणा के उलट, पीनट बटर का आविष्कार उन्होंने नहीं किया था। पूरी ज़िंदगी में उन्होंने सिर्फ़ तीन पेटेंट लिए। ज़्यादातर वे यही चाहते थे कि उनकी खोजों का इस्तेमाल सब खुलकर करें।
मशहूर, फिर भी विनम्र
1921 में कार्वर ने अमेरिकी कांग्रेस के सामने मूँगफली उद्योग के बारे में बात रखी। उन्हें दस मिनट दिए गए। सदस्यों को इतनी दिलचस्पी हुई कि उन्होंने उन्हें कहीं ज़्यादा देर तक बोलने दिया।
वे पूरे अमेरिका में मशहूर हो गए। आविष्कारक और राष्ट्रपति उनसे सलाह लेते थे। लेकिन वे टस्कगी में एक कमरे में सादगी से रहते, वही पुराने सूट पहनते, और अक्सर अपने कोट के बटन में एक ताज़ा फूल लगाते। अपनी बचत का बड़ा हिस्सा उन्होंने टस्कगी को दे दिया, ताकि आगे के छात्रों की मदद हो सके।
जॉर्ज वॉशिंगटन कार्वर का निधन 5 जनवरी 1943 को हुआ। उसी साल उनके जन्मस्थान को राष्ट्रीय स्मारक बनाया गया, अमेरिका का पहला ऐसा स्मारक जो किसी काले अमेरिकी के सम्मान में था।
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लिंडा ओ. मैकमरी की George Washington Carver: Scientist and Symbol एक सावधान जीवनी है, जो सच को किंवदंती से अलग करती है। उनके जन्मस्थान पर बने नेशनल पार्क सर्विस के जॉर्ज वॉशिंगटन कार्वर नेशनल मॉन्यूमेंट की वेबसाइट और संग्रहालय भी काफ़ी उपयोगी हैं।