← Back to stories

z z

For Kids

कछुआ और खरगोश

घास के मैदान का सबसे तेज़ जानवर अपनी जीत को लेकर इतना पक्का है कि झपकी लेने रुक जाता है। सबसे धीमा जानवर बस चलता रहता है।

  • 3 मिनट का पाठ
  • Ages 4–8
  • Fable & folk tale
  • Ancient Greece
इस भाषा में पढ़ें

खरगोश तेज़ था, और यह बात सब जानते थे, क्योंकि खरगोश हर रोज़ सबको यही बताता था।

"आज सुबह तुमने मुझे मैदान पार करते देखा?" वह कहता। "हवा से भी तेज़! टूटते तारे से भी तेज़! पूरी दुनिया में मेरे जितना तेज़ कोई नहीं।"

बाक़ी जानवर आँखें घुमा लेते। चिड़ियाँ ऐसा दिखातीं जैसे उन्होंने सुना ही नहीं। और कछुआ, जो बहुत धीरे-धीरे एक डैंडेलियन का फूल चबा रहा था, कुछ भी नहीं बोला।

"और तुम," खरगोश ने उसके चारों ओर उछल-उछलकर गोल चक्कर लगाते हुए कहा। "तुम तो सबसे धीमे जीव हो जो मैंने कभी देखा। तुम्हें तो नाश्ते तक पहुँचने में ही एक हफ़्ता लग जाता होगा।"

कछुए ने चबाना पूरा किया। फिर उसने ऊपर देखा।

"क्या तुम मुझसे दौड़ लगाओगे?" उसने पूछा।

दौड़

खरगोश इतनी ज़ोर से हँसा कि लुढ़क गया।

लेकिन कछुआ सच में यही चाहता था, और जल्दी ही पूरा मैदान देखने के लिए इकट्ठा हो गया। लोमड़ी ने शुरुआत के लिए धूल में एक लकीर खींची। उल्लू पहाड़ी के उस पार ओक के पुराने पेड़ के पास इंतज़ार करने को राज़ी हो गया, वहीं दौड़ ख़त्म होनी थी।

"तैयार," लोमड़ी ने कहा। "सावधान। दौड़ो!"

खरगोश तीर की तरह भाग निकला। कुछ ही धड़कनों में वह पहली छोटी-सी चढ़ाई पार करके नज़रों से ओझल हो गया।

कछुए ने एक पैर आगे रखा। फिर दूसरा। फिर एक और।

देखने वाले जानवरों ने लंबी साँस भरी। "बेचारा कछुआ," नन्हे खरगोश ने कहा। "सोने के समय तक भी यह चलता ही रहेगा।"

थोड़ा-सा आराम

पहाड़ी की आधी चढ़ाई पर खरगोश रुका और पीछे मुड़कर देखा। बहुत, बहुत पीछे, रास्ते पर उसे बस एक छोटा-सा भूरा बिंदु दिखाई दे रहा था।

"हा!" उसने कहा। "मैं रुककर दोपहर का खाना खा लूँ, नहा लूँ और एक गाना भी लिख लूँ, तब भी वह मुझे पकड़ नहीं पाएगा।"

धूप गुनगुनी थी। हॉथॉर्न के पेड़ के नीचे की घास मुलायम और ठंडी लग रही थी।

"बस एक मिनट आँखें बंद करके आराम कर लेता हूँ," खरगोश ने कहा।

और वह गहरी नींद सो गया।

क़दम-दर-क़दम

कछुआ नहीं रुका।

जब उसके पैर थक गए, तब भी वह नहीं रुका। जब रास्ता खड़ी चढ़ाई वाला और पथरीला हो गया, तब भी वह नहीं रुका। जब एक तितली उसके खोल पर आ बैठी और बोली, "क्यों परेशान हो रहे हो? तुम तो किसी हाल में नहीं जीत सकते," तब भी वह नहीं रुका।

"शायद नहीं," कछुए ने कहा। "लेकिन मैं चलता तो रह सकता हूँ।"

वह हॉथॉर्न के पेड़ के पास से गुज़रा, जहाँ खरगोश अपने कान चेहरे पर लटकाए खर्राटे ले रहा था। उसने उसे जगाया नहीं। उसने डींग नहीं मारी। वह बस चलता रहा, एक पैर, फिर अगला, फिर अगला।

अंत

जब खरगोश जागा, तो परछाइयाँ लंबी हो चुकी थीं और हवा ठंडी हो गई थी। उसने अँगड़ाई ली, जम्हाई ली और रास्ते पर नीचे की ओर देखा।

वहाँ कोई भूरा बिंदु नहीं था।

उसने पहाड़ी के ऊपर की ओर देखा, और उसका दिल धक् से बैठ गया। वहाँ, ओक के पुराने पेड़ के लगभग पास, कछुआ था।

खरगोश इतना तेज़ भागा जितना वह ज़िंदगी में कभी नहीं भागा था। वह पत्थरों के ऊपर से उड़ता हुआ गया। जड़ों के ऊपर से छलाँग लगाई। लेकिन बहुत देर हो चुकी थी। खरगोश के हाँफते हुए फिसलकर पहुँचने से ठीक पहले कछुए की नाक लकीर पार कर चुकी थी।

जानवरों ने इतनी ज़ोर से तालियाँ बजाईं और शोर मचाया कि पत्ते हिल गए।

खरगोश धूल में बैठ गया। पहली बार उसके पास कहने को कुछ नहीं था।

"तुम मुझसे बहुत तेज़ हो," कछुए ने प्यार से कहा। "लेकिन तेज़ होना और दौड़ पूरी करना एक बात नहीं है।"

इस नीतिकथा के बारे में

यह ईसप की सबसे मशहूर नीतिकथाओं में से एक है। ईसप प्राचीन यूनान के कहानीकार थे। यह कहानी सैकड़ों भाषाओं में दोबारा सुनाई गई है, और "धीमी पर लगातार चाल ही दौड़ जिताती है" दुनिया भर में एक कहावत बन चुकी है। यह संस्करण कहानी का छोटा और आसान किया हुआ पुनर्कथन है।

Read next

For KidsFable & folk tale

The Thirsty Crow

On the hottest day of the year, a tired crow finds a pitcher with a little water at the very bottom. Her beak can't reach it. So she thinks.

4 min readAges 4–8Ancient Greece and India
For KidsFable & folk tale

Counting the Crows

Emperor Akbar asks his court a question nobody could possibly answer. How many crows live in the city? Birbal answers at once.

4 min readAges 5–9Mughal India, 16th century
For KidsFable & folk tale

The Ant and the Grasshopper

All summer long, Grasshopper sings while Ant carries grain. Then the first cold wind blows across the field.

4 min readAges 4–8Ancient Greece