जीने के लिए दो साल
इक्कीस साल की उम्र में स्टीफ़न हॉकिंग को बताया गया कि उन्हें ऐसी बीमारी है जो शायद दो साल के भीतर उनकी जान ले लेगी। वे पचपन साल और जिए, और ब्रह्मांड को देखने का हमारा नज़रिया बदल दिया।
- 4 मिनट की कहानी
- Ages 12+
- Biography
- 1940s–2010s
ध्यान दें: इस कहानी में एक गंभीर, लंबी बीमारी और विकलांगता का ज़िक्र है।
1963 में, इक्कीस साल का एक नौजवान लंदन के एक अस्पताल में लेटा था, और डॉक्टर एक के बाद एक जाँच कर रहे थे।
वह कुछ समय से अनाड़ी होता जा रहा था। सीढ़ियों पर लड़खड़ा जाता, जूतों के फीते बाँधने में उलझ जाता। उसकी बोली भी थोड़ी लड़खड़ाने लगी थी। जब नतीजे आए, तो डॉक्टरों ने बताया कि उसे मोटर न्यूरॉन डिज़ीज़ है, एक ऐसी बीमारी जो धीरे-धीरे उन नसों को नष्ट कर देती है जो मांसपेशियों को चलाती हैं। इसका कोई इलाज नहीं था। उनका अंदाज़ा था कि वह शायद दो साल और जी पाएगा।
उसका नाम स्टीफ़न हॉकिंग था। वह भौतिकी का छात्र था, और तब तक वह बहुत मेहनत नहीं कर रहा था।
होशियार, पर आलसी छात्र
स्टीफ़न का जन्म 8 जनवरी 1942 को इंग्लैंड के ऑक्सफ़र्ड में हुआ। उनके माता-पिता दोनों ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी में पढ़े थे, और घर किताबों से भरा रहता था। बचपन में वे घड़ियाँ और रेडियो खोलकर अलग कर देते थे, हालाँकि उन्होंने माना कि उन्हें वापस जोड़ने में वे हमेशा अच्छे नहीं थे।
सत्रह साल की उम्र में वे भौतिकी पढ़ने ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी गए। उनके अपने शब्दों के मुताबिक़, पढ़ाई उन्हें आसान लगती थी और वे उस पर बहुत कम मेहनत करते थे। ज़्यादा समय दोस्तों के साथ नदी में नाव खेने में बीतता था। फिर भी उन्होंने अच्छे नंबर पाए, और ब्रह्मांड की शुरुआत पर डॉक्टरेट करने के लिए कैम्ब्रिज चले गए।
कैम्ब्रिज में उनके पहले साल में ही इस बीमारी का पता चला।
जीने की एक वजह
पहले-पहल, जैसा उन्होंने बाद में लिखा, वे गहरी उदासी में डूब गए। उन्हें डॉक्टरेट पूरी करने का कोई मतलब नज़र नहीं आता था, अगर वे उसका इस्तेमाल करने तक ज़िंदा ही न रहें।
दो बातों ने उनका मन बदल दिया। अस्पताल में उन्होंने पास के बिस्तर पर एक लड़के को ल्यूकीमिया से मरते देखा था, और इससे उन्हें एहसास हुआ कि दूसरों की क़िस्मत उनसे भी बुरी है। और बीमारी का पता चलने से कुछ ही पहले उनकी मुलाक़ात भाषाओं की एक छात्रा, जेन वाइल्ड, से हुई थी। दोनों में प्यार हुआ और उनकी सगाई हो गई। अब उनके पास मेहनत करने की वजह थी, और योजना बनाने के लिए एक भविष्य।
बीमारी भी उतनी तेज़ी से नहीं बढ़ी जितना डॉक्टरों को डर था। स्टीफ़न पूरे मन से अपने शोध में जुट गए। 1965 में उन्होंने जेन से शादी की, और उनके तीन बच्चे हुए: रॉबर्ट, लूसी और टिम।
ब्लैक होल उतने काले नहीं
हॉकिंग ने विज्ञान के कुछ सबसे बड़े सवालों पर काम किया। गणितज्ञ रॉजर पेनरोज़ के साथ मिलकर उन्होंने दिखाया कि आइंस्टाइन के गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत के मुताबिक़, ब्रह्मांड की शुरुआत एक अकेले बिंदु से हुई होगी, जिसे आज हम बिग बैंग कहते हैं।
फिर 1974 में उन्होंने एक हैरान करने वाली खोज की घोषणा की। ब्लैक होल अंतरिक्ष की वे जगहें हैं जहाँ गुरुत्वाकर्षण इतना ताक़तवर होता है कि माना जाता था कि वहाँ से कुछ भी, रोशनी तक, बाहर नहीं निकल सकती। हॉकिंग ने भौतिकी के दो महान सिद्धांतों को जोड़कर दिखाया कि असल में ब्लैक होल से विकिरण की एक हल्की-सी चमक निकलनी चाहिए, और वे बहुत धीरे-धीरे सिकुड़ते जाते हैं। वैज्ञानिक इसे हॉकिंग विकिरण कहते हैं।
उसी साल, बत्तीस की उम्र में, उन्हें रॉयल सोसाइटी का फ़ेलो चुना गया। यह सम्मान पाने वाले वे अब तक के सबसे कम उम्र के लोगों में से एक थे। 1979 में वे कैम्ब्रिज में गणित के ल्यूकेशियन प्रोफ़ेसर बने, एक ऐसा पद जिस पर कभी आइज़क न्यूटन रहे थे।
एक नई आवाज़
तब तक वे व्हीलचेयर इस्तेमाल करने लगे थे, और ज़्यादातर लोगों के लिए उनकी बात समझना मुश्किल था। 1985 में स्विट्ज़रलैंड जाने पर उन्हें निमोनिया हो गया और वे मरते-मरते बचे। उनकी जान बचाने के लिए डॉक्टरों को उनके गले का ऑपरेशन करना पड़ा। उसके बाद वे बिलकुल नहीं बोल पाते थे।
कुछ समय तक वे शब्दों को अक्षर-अक्षर करके बताते थे: कोई एक कार्ड पर अक्षरों की ओर इशारा करता, और वे भौंहें उठाकर सही अक्षर चुनते। फिर अमेरिका के एक कंप्यूटर प्रोग्रामर ने उन्हें एक प्रोग्राम भेजा, जिससे वे स्क्रीन पर शब्द चुन सकते थे और एक मशीन उन्हें बोलकर सुना देती थी। उस आवाज़ का लहजा अमेरिकी था। बाद में बेहतर आवाज़ें आ जाने के बाद भी उन्होंने ज़िंदगी भर वही आवाज़ रखी, क्योंकि उनका कहना था कि वह अब उनकी अपनी हो चुकी थी।
वे बहुत धीरे लिखते थे, एक मिनट में कुछ ही शब्द। फिर भी 1988 में उन्होंने A Brief History of Time प्रकाशित की, एक किताब जिसने आम पाठकों को ब्रह्मांड समझाया। इसकी एक करोड़ से ज़्यादा प्रतियाँ बिकीं, और यह उन्हें दुनिया के सबसे मशहूर वैज्ञानिकों में ले आई।
एक लंबी ज़िंदगी
स्टीफ़न हॉकिंग टेलीविज़न पर आए, दुनिया भर में घूमे, और पैंसठ साल की उम्र में एक ख़ास विमान में भारहीन होकर तैरे, बेहद ख़ुश। वे अक्सर विकलांग लोगों के पूरी ज़िंदगी जीने के अधिकार के बारे में बोलते थे, और जिज्ञासा की अहमियत के बारे में भी।
14 मार्च 2018 को, छिहत्तर साल की उम्र में, कैम्ब्रिज में अपने घर पर उनका निधन हुआ। वे डॉक्टरों के अंदाज़े से पचपन साल ज़्यादा जिए थे। उनकी अस्थियाँ वेस्टमिंस्टर ऐबी में, आइज़क न्यूटन और चार्ल्स डार्विन की क़ब्रों के पास रखी गईं।
और पढ़ना चाहते हैं?
हॉकिंग की अपनी किताब My Brief History उनकी ज़िंदगी का एक छोटा, ईमानदार और अक्सर मज़ेदार संस्मरण है। A Brief History of Time आज भी ब्लैक होल और बिग बैंग को समझने के लिए सबसे अच्छी शुरुआती किताबों में से एक है।