पंप का पानी
हेलेन केलर न देख सकती थीं, न सुन सकती थीं, और उनके पास किसी भी चीज़ के लिए कोई शब्द नहीं था, जब तक कि अलबामा में एक पानी के पंप पर एक धुन की पक्की युवा शिक्षिका ने उनकी हथेली पर उँगलियों से एक शब्द के अक्षर नहीं बनाए।
- 4 मिनट का पाठ
- Ages 8+
- Biography
- 1880s–1960s
हेलेन केलर का जन्म 1880 में दक्षिणी अमेरिका के अलबामा राज्य के एक छोटे-से शहर टस्कम्बिया में हुआ था। वे एक स्वस्थ, चंचल बच्ची थीं।
जब वे लगभग उन्नीस महीने की थीं, तब उन्हें तेज़ बुख़ार हुआ और वे बहुत बीमार पड़ गईं। उस समय डॉक्टरों को पता नहीं था कि यह कौन-सी बीमारी है; आज कुछ लोगों का मानना है कि शायद यह स्कार्लेट फ़ीवर या मेनिनजाइटिस रहा होगा। हेलेन ठीक हो गईं। लेकिन उस बीमारी ने उन्हें पूरी तरह अंधा और पूरी तरह बहरा कर दिया।
बंद दुनिया
जैसे-जैसे हेलेन बड़ी हुईं, वे न चेहरे देख पाती थीं, न आवाज़ें सुन पाती थीं। उनके पास शब्द सीखने का कोई ज़रिया नहीं था। अपने परिवार से बात करने के लिए उन्होंने ख़ुद ही लगभग साठ आसान इशारे बना लिए थे, लेकिन उनकी दुनिया अँधेरी, ख़ामोश और उलझन भरी थी।
वे बेक़ाबू और चिड़चिड़ी होती गईं। उन्हें ग़ुस्से के दौरे पड़ते। वे चीज़ें तोड़ देतीं, लातें मारतीं और चीख़तीं, दूसरों की थालियों से खाना झपट लेतीं। कुछ रिश्तेदारों का मानना था कि उन्हें किसी संस्था में भेज देना चाहिए।
उनके माता-पिता ने मना कर दिया। उन्होंने लॉरा ब्रिजमैन नाम की एक महिला के बारे में पढ़ा था, जो देख और सुन नहीं सकती थीं, और जिन्हें बॉस्टन के पर्किन्स इंस्टीट्यूशन फ़ॉर द ब्लाइंड में पढ़ाया गया था। उन्होंने मदद के लिए चिट्ठी लिखी, और पर्किन्स ने उनके पास एक शिक्षिका भेज दी।
टीचर
उनका नाम ऐनी सुलिवन था। वे बीस साल की थीं, और ख़ुद भी लगभग अंधी थीं। वे बहुत ग़रीबी में पली-बढ़ी थीं और पर्किन्स भेजे जाने से पहले बरसों तक ग़रीबों के एक बदहाल आश्रय-घर में रही थीं। पर्किन्स में उनके कई ऑपरेशन हुए, जिनसे उनकी आँखों की रोशनी कुछ हद तक लौट आई। उन्होंने हाल ही में अपनी कक्षा में सबसे अव्वल रहकर पढ़ाई पूरी की थी।
ऐनी 3 मार्च 1887 को केलर परिवार के घर पहुँचीं। बाद में हेलेन ने इसे अपनी ज़िंदगी का वह सबसे अहम दिन कहा, जो उन्हें याद था।
ऐनी ने फ़ौरन काम शुरू कर दिया। उन्होंने हेलेन को एक गुड़िया दी, और फिर उनके हाथ पर d-o-l-l (डॉल, यानी गुड़िया) शब्द के अक्षर बनाए। इसके लिए उन्होंने उँगलियों की वर्णमाला का इस्तेमाल किया, जिसमें हर अक्षर उँगलियों से बनी एक अलग आकृति होता है।
हेलेन ने उन हरकतों की नक़ल की। उन्होंने doll, cake, cup और बहुत-से दूसरे शब्दों के अक्षर बनाना सीख लिया। लेकिन उनके लिए यह बस एक खेल था। वे नहीं समझ पाईं कि उनके हाथ पर बनी ये आकृतियाँ नाम हैं, कि दुनिया की हर चीज़ का एक नाम होता है।
ज़िद की लड़ाई
ऐनी को जल्दी ही समझ आ गया कि हेलेन को पढ़ाने से पहले उन्हें उनके ग़ुस्से के दौरों को रोकना होगा। दोनों के बीच ज़बरदस्त लड़ाइयाँ हुईं। नाश्ते की मेज़ पर हुई एक मशहूर लड़ाई घंटों चली, जब तक कि आख़िरकार हेलेन अपनी कुर्सी पर बैठने, अपनी थाली से खाने और अपना नैपकिन तह करने के लिए राज़ी नहीं हो गईं।
ऐनी ने परिवार को मना लिया कि वे उन्हें कुछ हफ़्तों के लिए बाग़ के एक छोटे-से कॉटेज में हेलेन के साथ अकेले रहने दें, ताकि वे उन्हें धैर्य और भरोसा सिखा सकें। धीरे-धीरे हेलेन शांत हो गईं।
पंप
अप्रैल 1887 की एक सुबह, ऐनी के आने के लगभग एक महीने बाद, दोनों बाग़ में टहल रही थीं, और वे पानी के पंप के पास पहुँचीं।
कोई पानी भर रहा था। ऐनी ने हेलेन का एक हाथ ठंडी धार के नीचे रखा। उनके दूसरे हाथ पर उन्होंने w-a-t-e-r (वॉटर, यानी पानी) के अक्षर बनाए, पहले धीरे-धीरे, फिर जल्दी-जल्दी।
हेलेन ठिठककर खड़ी रह गईं।
बरसों बाद, अपनी आत्मकथा में, उन्होंने बताया कि उस पल क्या हुआ था:
"अचानक मुझे एक धुँधला-सा एहसास हुआ, जैसे कोई भूली हुई बात याद आ रही हो — लौटते हुए विचार की एक सिहरन; और किसी तरह भाषा का रहस्य मेरे सामने खुल गया। तब मैं जान गई कि 'w-a-t-e-r' का मतलब वह अद्भुत, ठंडी चीज़ है जो मेरे हाथ पर से बह रही थी। उस जीवित शब्द ने मेरी आत्मा को जगा दिया, उसे रोशनी, उम्मीद, ख़ुशी दी, उसे आज़ाद कर दिया!"
वे घुटनों के बल बैठ गईं और ज़मीन को छुआ, और उसका नाम जानना चाहा। उन्होंने पंप की ओर इशारा किया, और बेलों वाली जाली की ओर। फिर उन्होंने मुड़कर ऐनी का नाम पूछा। ऐनी ने t-e-a-c-h-e-r (टीचर, यानी शिक्षिका) के अक्षर बनाए।
ऐनी सुलिवन के अनुसार, उस दिन हेलेन ने तीस नए शब्द सीखे।
आज़ाद हुआ मन
उसके बाद उन्हें कोई रोक नहीं सका। हेलेन ने ब्रेल पढ़ना सीखा, उभरे हुए बिंदुओं की एक लिपि जिसे उँगलियों से पढ़ा जा सकता है। उन्होंने लिखना सीखा। उन्होंने ज़ोर से बोलना सीखा, हालाँकि अजनबियों के लिए उनकी आवाज़ समझना मुश्किल होता था। उन्होंने लोगों के होंठों और गले पर अपनी उँगलियाँ रखकर उन्हें "सुनना" सीखा।
उन्होंने फ़्रेंच, जर्मन, लैटिन और ग्रीक सीखीं।
1904 में उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय के महिला कॉलेज, रैडक्लिफ़ कॉलेज, से सम्मान के साथ स्नातक की पढ़ाई पूरी की। वे बैचलर की डिग्री पाने वाली पहली ऐसी व्यक्ति थीं जो देख और सुन नहीं सकती थीं। ऐनी सुलिवन हर लेक्चर में उनके पास बैठतीं और उनके हाथ पर शब्दों के अक्षर बनाती रहतीं।
काम से भरी एक ज़िंदगी
हेलेन केलर दुनिया की सबसे मशहूर महिलाओं में से एक बन गईं। उन्होंने बारह किताबें और बहुत-से लेख लिखे। उन्होंने पैंतीस से ज़्यादा देशों की यात्रा की, जिनमें 1955 में भारत भी शामिल था, और अंधे और बहरे लोगों, महिलाओं और मज़दूरों के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाई। उन्होंने चालीस से ज़्यादा बरसों तक अमेरिकन फ़ाउंडेशन फ़ॉर द ब्लाइंड के लिए पैसे जुटाने में मदद की।
ऐनी सुलिवन 1936 में अपनी मृत्यु तक उनके साथ रहीं। हेलेन उन्हें हमेशा बस "टीचर" कहकर बुलाती थीं।
हेलेन केलर का निधन 1968 में, सत्तासी साल की उम्र में हुआ।
और पढ़ना चाहते हैं?
हेलेन केलर की आत्मकथा, The Story of My Life, जो उन्होंने रैडक्लिफ़ में पढ़ाई के दौरान ही लिखी थी, पब्लिक डोमेन में है और मुफ़्त पढ़ी जा सकती है। इसमें ऐनी सुलिवन की वे चिट्ठियाँ भी शामिल हैं, जिनमें उन्होंने हेलेन को पढ़ाने के शुरुआती दिनों का हाल लिखा है। The Miracle Worker, एक मशहूर नाटक और फ़िल्म, भी यह कहानी सुनाती है।