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Life Lessons

जहाँ प्रेम है, वहाँ ईश्वर है

एक अकेले बूढ़े मोची को रात में एक आवाज़ सुनाई देती है, जो कल एक मेहमान के आने का वादा करती है। सारा दिन वह अपने तहख़ाने की खिड़की से गली को देखता है, इंतज़ार करता है। टॉल्स्टॉय की एक कोमल कहानी।

  • 5 मिनट का पाठ
  • Ages 9+
  • Classic retold
  • 1880s

ध्यान दें: इस कहानी में एक पत्नी और बच्चों की मौत का संक्षिप्त ज़िक्र है।

इस भाषा में पढ़ें

मार्टिन अव्देइच तहख़ाने के एक कमरे में रहता था, जिसमें बस एक खिड़की थी। खिड़की गली की ओर खुलती थी, पर इतनी नीचे थी कि आते-जाते लोगों के बस पैर ही दिखाई देते थे।

मार्टिन को इससे ख़ास फ़र्क़ नहीं पड़ता था। वह मोची था, और उस शहर में इतने बरसों से जूते गाँठ रहा था कि ज़्यादातर जूते उसे ज़बानी याद थे। वह नज़र उठाता और सोचता, वह तला मैंने लगाया था। वह एड़ी मैंने जोड़ी थी। उस छोटी-सी खिड़की से वह पूरे शहर को गुज़रते देखता, एक-एक जोड़ी पैर करके।

भारी मन

मार्टिन हमेशा से संतुष्ट नहीं था। जब उसके बच्चे छोटे थे, तभी उसकी पत्नी चल बसी थी। फिर एक-एक करके बच्चे भी चल बसे, यहाँ तक कि बस एक छोटा लड़का बचा। मार्टिन उस लड़के को पूरे दिल से प्यार करता था। फिर लड़के को बुख़ार हुआ, और एक हफ़्ते के भीतर वह भी चला गया।

उसके बाद मार्टिन गहरी निराशा में डूब गया। उसने गिरजाघर जाना छोड़ दिया। उसने ईश्वर से कहा कि वह मरना चाहता है, और पूछा कि जब एक बच्चे को उठा लिया गया, तो उस जैसे बूढ़े को क्यों ज़िंदा छोड़ दिया गया।

एक दिन उसके अपने गाँव का एक बूढ़ा तीर्थयात्री उससे मिलने आया। मार्टिन ने अपना सारा दुख उसके सामने उड़ेल दिया। बूढ़े ने सुना, और फिर नरमी से कहा कि उसका दुख इसलिए है कि वह सिर्फ़ अपनी ख़ुशी के लिए जीता रहा है। उसने कहा कि इंसान को ईश्वर के लिए जीना चाहिए, और दूसरों के लिए। उसने मार्टिन से सुसमाचार पढ़ने को कहा, वहीं वह सीखेगा कि ऐसे कैसे जिया जाता है।

तो मार्टिन ने बड़े अक्षरों वाली एक बाइबल ख़रीदी और हर शाम थोड़ा-थोड़ा पढ़ने लगा। फिर वह और पढ़ने लगा, और फिर और ज़्यादा। उसका मन हल्का होता गया। छुट्टी के दिनों में शराबख़ाने जाने के बजाय वह अपने दीये के पास बैठकर पढ़ता।

रात में एक आवाज़

एक शाम वह एक अमीर आदमी की कहानी पढ़ रहा था, जिसने यीशु को अपने घर बुलाया, पर न उन्हें पैर धोने को पानी दिया, न स्वागत में चुंबन। मार्टिन ने किताब नीचे रखी और सोचने लगा। अगर वे मेरे पास आएँ, उसने सोचा, तो क्या मैं उस आदमी जैसा निकलूँगा? या मुझे उनका स्वागत करना आएगा?

उसने अपना सिर बाँहों पर टिकाया और ऊँघने लगा।

अचानक उसे एक आवाज़ सुनाई दी, जैसे कोई उसके कान के पास साँस ले रहा हो। मार्टिन! कल गली में देखना, क्योंकि मैं आऊँगा।

वह चौंककर जाग गया। कमरे में कोई नहीं था। वह समझ नहीं पाया कि उसने सपना देखा था या नहीं। पर वह उन शब्दों को मन में लिए ही सोने चला गया।

तीन मेहमान

अगली सुबह मार्टिन पौ फटने से पहले उठा, चूल्हा जलाया, पत्तागोभी का शोरबा और दलिया पकने रखा, और काम करने खिड़की के पास बैठ गया। पर हर गुज़रती जोड़ी जूतों पर वह बार-बार नज़र उठा लेता।

पहले पैर जो उसने पहचाने, वे स्तेपानिच के थे, एक बूढ़ा सिपाही जो एक व्यापारी के यहाँ छोटे-मोटे काम करता था। स्तेपानिच खिड़की के सामने बर्फ़ हटा रहा था। वह बूढ़ा और कमज़ोर था, और थोड़ी देर बाद वह काँपता हुआ, साँस लेने के लिए अपने फावड़े पर टिक गया।

मार्टिन ने शीशे पर थपथपाया और उसे इशारे से अंदर बुलाया। उसने उसे चूल्हे के पास बिठाया और गिलास पर गिलास गरम चाय पिलाई। और जब बूढ़ा सिपाही अपने हाथ सेंक रहा था, मार्टिन ने उसे उस आवाज़ के बारे में बताया, और उस आदमी के बारे में जिसने यीशु का स्वागत नहीं किया था। स्तेपानिच की आँखें भर आईं।

बाद में, बाहर दीवार के पास एक औरत आकर रुकी। वह अजनबी थी, ग़रीबी के हाल में, गर्मियों के पतले कपड़े पहने, गोद में एक बच्चा लिए। वह हवा की ओर पीठ करके रोते हुए बच्चे को अपनी पतली पोशाक में लपेटने की कोशिश कर रही थी।

मार्टिन जल्दी से सीढ़ियाँ चढ़कर ऊपर गया और उसे अंदर बुला लाया। उसने उसे अपनी मेज़ पर रोटी और शोरबा दिया, और जब तक वह खाती रही, बच्चे को गोद में संभाले रहा। उसने बताया कि उसका पति सिपाही है, जिसे आठ महीने पहले कहीं दूर भेज दिया गया था, और कल ही उसने अपनी आख़िरी गरम शॉल गिरवी रख दी थी। मार्टिन अपनी खूँटी के पास गया और एक पुराना लबादा उतार लाया। "यह ले लो," उसने कहा। "पुराना है, पर इसमें बच्चे को लपेटने का काम चल जाएगा।" उसने उसे थोड़े पैसे भी दिए, ताकि वह अपनी शॉल छुड़ा सके।

दोपहर में, सेब बेचने वाली एक बूढ़ी औरत अपनी टोकरी उतारकर सुस्ताने के लिए खिड़की के पास रुकी। फटी टोपी पहने एक लड़का दौड़ता हुआ आया, एक सेब झपटा और भागने लगा। बूढ़ी औरत ने उसे बालों से पकड़ लिया और डाँटने लगी, धमकी देने लगी कि उसे घसीटकर पुलिस के पास ले जाएगी।

मार्टिन दौड़कर बाहर आया। उसने बूढ़ी से मिन्नत की कि लड़के को छोड़ दे। "अगर हमें हमारी हर ग़लती की सज़ा मिले," उसने कहा, "तो हमारा क्या होगा?" उसने लड़के से माफ़ी माँगने को कहा, और लड़के ने माफ़ी माँग ली। मार्टिन ने बूढ़ी को सेब के पैसे दे दिए।

फिर बूढ़ी बड़बड़ाने लगी कि आजकल के बच्चे बिगड़ गए हैं। पर बोलते-बोलते वह नरम पड़ गई। उसने बताया कि उसके भी पोते-पोतियाँ हैं। जब वह जाने के लिए अपना भारी बोरा उठाने लगी, तो लड़का उछलकर आगे आया। "मुझे उठाने दो, दादी," उसने कहा। "मैं भी उधर ही जा रहा हूँ।" और दोनों साथ-साथ गली में चल दिए।

वह मैं था

उस शाम, जब काम करने के लिए बहुत अँधेरा हो गया, मार्टिन ने अपने औज़ार समेटे, दीया जलाया और ताक़ से बाइबल उतारी। उसका मन थोड़ा उदास था। दिन ख़त्म हो गया था, और जिस मेहमान का उसे इंतज़ार था, वह नहीं आया था।

तभी उसे अपने पीछे क़दमों की आहट सुनाई दी। उसने मुड़कर देखा। अँधेरे कोने में जैसे कुछ लोग खड़े थे।

मार्टिन, आवाज़ ने कहा। क्या तुम मुझे नहीं पहचानते?

कौन है? मार्टिन ने पूछा।

यह मैं हूँ, आवाज़ ने कहा। और कोने से स्तेपानिच निकलकर आया, मुस्कुराया, और बादल की तरह ग़ायब हो गया।

यह मैं हूँ, आवाज़ ने फिर कहा। और वहाँ बच्चे वाली वह औरत खड़ी थी। औरत मुस्कुराई, बच्चा खिलखिलाया, और वे भी ग़ायब हो गए।

यह मैं हूँ। और सेब बेचने वाली बूढ़ी और वह लड़का वहाँ मुस्कुराते खड़े थे, और फिर वे भी ओझल हो गए।

मार्टिन का दिल ख़ुशी से भर गया। उसने नीचे बाइबल की ओर देखा, जो अपने-आप खुल गई थी, और पन्ने के ऊपर पढ़ा: क्योंकि मैं भूखा था, और तुमने मुझे खाना दिया; मैं प्यासा था, और तुमने मुझे पानी पिलाया; मैं परदेसी था, और तुमने मुझे अपने घर में ठहराया।

और नीचे: तुमने मेरे इन सबसे छोटे भाइयों में से किसी एक के साथ जो कुछ किया, वह मेरे ही साथ किया।

तब मार्टिन समझ गया कि उसका मेहमान आख़िर उस दिन उसके पास आया था, और उसने उसका स्वागत किया था।

इस कहानी के बारे में

लियो टॉल्स्टॉय (1828–1910), वॉर एंड पीस के महान रूसी लेखक, ने 1880 के दशक में आम पाठकों के लिए सरल कहानियों की एक श्रृंखला लिखी, जिनमें से कई दया और आस्था के बारे में हैं। यह कहानी एक पुरानी फ़्रांसीसी कथा पर आधारित है। यह उसका एक छोटा और सरल किया हुआ पुनर्कथन है।

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